डिंडौरी सी टाइम्स प्रदीप सिंह राजपूत।सरकार जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और स्कूलों में शैक्षणिक माहौल तैयार करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ जिम्मेदारों की लापरवाही इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही है। डिंडौरी जिले के प्राथमिक शाला पौड़ी रैयत से सामने आया एक मामला सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।
यहां प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक रतन लाल नागेश पर स्कूल के बच्चों ने आरोप लगाया है कि उन्हें स्कूल में पढ़ाई कराने के बजाय किताबों की ढुलाई का काम करवाया जा रहा है यह कार्य शिक्षक के कहने पर कर रहे हैं। वही ग्रामीणों का कहना है कि जिन बच्चों को स्कूल में बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए थी, उन्हीं बच्चों के सिर पर पुस्तकों के बंडल रखकर लंबी दूरी तय कराई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक शाला पौड़ी रैयत में अध्ययनरत छोटे-छोटे बच्चे नियमित रूप से स्कूल पहुंचते हैं। लेकिन हाल ही में सामने आई तस्वीरों ने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। बताया जा रहा है कि बच्चों से स्कूल की किताबें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम कराया गया। इस दौरान बारिश के मौसम में कुछ बच्चियां भी किताबों को रखकर स्कूल पहुंचती दिखाई दीं।
ग्रामीणों के मुताबिक बच्चों की उम्र ऐसी है जब उन्हें किताब-कॉपी लेकर विद्यालय जाना चाहिए और शिक्षक से ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। लेकिन यहां बच्चों के हाथों में कलम की जगह जिम्मेदारियों का बोझ दिखाई दिया। मासूम कंधों पर शिक्षा का नहीं बल्कि किताबों की ढुलाई का भार नजर आया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षक द्वारा बच्चों से इस तरह का काम कराया जाना पूरी तरह गलत है। उनका कहना है कि स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है। ऐसे में यदि बच्चों से श्रम जैसा कार्य कराया जाता है तो यह उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित माहौल और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए। विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, न कि उनसे किसी भी प्रकार का ऐसा कार्य कराया जाए जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो।
ग्रामीण क्षेत्रों में वैसे भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। कभी शिक्षकों की अनुपस्थिति तो कभी मूलभूत सुविधाओं की कमी के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में प्राथमिक शाला पौड़ी रैयत का यह मामला एक बार फिर यह सोचने को मजबूर करता है कि आखिर बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों को लेकर जिम्मेदार कितने गंभीर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल प्रशासन को बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने संज्ञान लिया है। जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) द्वारा संबंधित शिक्षक रतन लाल नागेश के खिलाफ जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों से किताबों की ढुलाई क्यों कराई गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
वहीं ग्रामीणों की नजर अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी स्कूल में मासूम बच्चों से पढ़ाई के अलावा कोई अन्य कार्य न कराया जा सके।
क्योंकि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके हाथों में किताबें तो होनी चाहिए, लेकिन उन किताबों का बोझ ढोने की जिम्मेदारी नहीं। मामले पर शिक्षक जानकारी देने के बजाय सी टाइम्स जिला प्रतिनिधि के सवालों के जवाब से भागते नजर आए
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