शहर मे कच्चे मकान मे पिछले दो दशक से संचालित गुरुकुल स्कूल के पक्के भवन निर्माण का वर्षो पुराना सपना अब जल्द ही पूरा होगा । नये भवन निर्माण के लिए मंगलवार को विधि विधान से पूजा अर्चना के साथ भूमि पूजन किया गया । जिसमे नेतागण, व्यापारी समाजसेवी और गणमान्य नागरिक गण मौजूद रहे ।
गौरतलब रहे की बालाघाट शहर से लगे देवटोला मे 20 वर्षो से निःशुल्क शिक्षा की मिशाल के रूप मे संचालित गुरुकुल स्कूल की नीव 2006 मे अशोक बोहने और पायल लिल्हारे के द्वारा कुछ गरीब बच्चो को बरगद के पेड़ के नीचे पढ़ाने रखी गई थी जिनकी कुछ वर्षोबीके बाद किराये से कच्चे मकान मे संचालित की गई ।
इस स्कूल में निःशुल्क रूप से इलाके के कई गांव के बच्चो को अध्यापन कराया गया । जिनकी आज 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी हजारों बच्चो को निःशुल्क शिक्षा देकर देश की भावी पीढ़ी तैयार करने मे अपना योगदान देते आ रहे है । बीस वर्षो मे गुरुकुल स्कूल मे शिक्षक भी निःशुल्क रूप से इसकी नींव रखने वाले अशोक बोहने और पायल अध्यापन कार्य मे मददगार रहे हैं। कई उतार चढ़ाव और जबरदस्त संघर्ष के साथ गुरुकुल स्कूल को बनाये रखे । इस स्कूल को पक्का बने कई प्रकार से संघर्ष के बीच अब बालाघाट और आसपास के कई मददगार सामने आये और निःशुल्क स्कूल की मिशाल को बनाये रखने अपना योगदान देते रहे ।
आखिरकार जर्ज़र कच्चे मकान मे संचालित गुरुकुल स्कूल के पक्के भवन की अवधारणा और देखा गया सपना अब साकार होने जा रहा है जिसके लिए मंगलवार को गुरुकुल स्कूल के प्रांगण मे भूमिपूजन किया गया । जिसमे बड़ी संख्या मे नेता,व्यापारी, गणमान्य नागरिक मौजूद रहे जँहा स्कूल भवन निर्माण के संकल्प के साथ आर्थिक राशि,सामग्री और अन्य तरह की मदद के लिए कई हाथ आगे आये जँहा महिलाओं और व्यापारियों ने अच्छी खासी राशि दान देने के बाद आगे भी मदद का भरोसा दिए साथ ही साझा प्रयास से मदद के इस प्रयास को मुहीम बनाकर गुरुकुल स्कूल भवन निर्माण करने का संकल्प भी लिए ।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं संघ के जिला संघ चालक वैभव कश्यप ने कहा की गुरुकुल स्कूल मे आकर उन्हें मंदिर के सामान सुकून और ऊर्जा महसूस होती है । भारी संघर्ष के बाद निःशुल्क गुरुकुल स्कूल को बनाये रखने मे अशोक बोहने और पायल लिल्हारे ने अपना जीवन लगा दिए । अशोक बोहने खुद के निजी स्वार्थ की परवाह किये बगैर अपने अटल इरादे से स्कूल को बनाये हुए है जो एक तपस्वी की तपस्या से ही संभव है और अब गुरुकुल के पक्के भवन निर्माण की प्रतीक्षा भी मानो समाप्त हो गयी है । सभी से भूमि पूजन के बाद योगदान और मदद के लिए हाथ बढ़ाने के साथ अन्य लोगो को भी प्रेरित करने की अपील की गई ।
पूर्व नपा अध्यक्ष रमेश रंगलानी ने कहा कि निःशुल्क गुरुकुल स्कूल मिशाल है और इसको बनाने के लिए योगदान देना हम सबके लिए सौभाग्य की बात है निश्चित ही साझा प्रयास से स्कूल भवन बनेगा । सुभाष कोचर,रितेश अग्रवाल,और मंच संचालन करते हुए तपेश आसाटी ने कहा की इस गुरुकुल स्कूल के संघर्ष को उन्होंने 2006 से एक बरगद के पेड़ के निचे से शुरू होते देखा है यंहा अशोक बोहने, पायल लिल्हारे निःशुल्क पढ़ाने वाले शिक्षकों,अन्य सदस्यो का कठिन उतार चढ़ाव और जबरदस्त संघर्ष भी देखें है मजबूत इरादे के साथ अब मदद मिलने और साझा प्रयास से पक्का भवन का निर्माण भी संभव हो जायेगा यंहा वक्ताओ ने कहा की सपने भले ही अधूरे रह जाते है परन्तु संकल्प पुरे हो जाते है ।
इस अवसर पूर्व भाजपा अध्यक्ष रमेश रंगलानी,शुरेश कोचर,सुरेश रंगलानी, अमर सिंह ठाकुर,मिना चावड़ा,सुधीर तोमर,हरीश लिल्हारे,प्रशन्न कांकरिया,रितेश अग्रवाल,सुभाष गुप्ता,महफूज अली,अजय ठाकुर,प्रवीण ठोबरे,श्रेयांश वैध,रुपेश दुबे,राधिका आसाटी, भूमेश्वरी, तिवड़े,रजनी मोहारे,शालिनी टोंक,राजवंति दामाहे,आरती बघेले, विमला पिछोड़े सहित अन्य और छात्रगण मौजूद रहे


