जबलपुर। शहर में इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो अधारताल थाना क्षेत्र का है, जिसमें एक महिला की गिरफ्तारी को लेकर कई तरह के दावे और आरोप लगाए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच बहस छिड़ गई है और पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
वायरल वीडियो को साझा करने वाले कुछ लोगों का आरोप है कि अवैध शराब कारोबार से जुड़ी बताई जा रही महिला की गिरफ्तारी केवल औपचारिकता निभाने के लिए की गई। सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों में यह भी कहा जा रहा है कि महिला और पुलिस के बीच सांठगांठ है तथा कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा किया जाता है। कुछ पोस्टों में महिला द्वारा पुलिस को कथित रूप से मोटी रकम दिए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि अधारताल थाना पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ नियमित रूप से कार्रवाई की जाती है और संबंधित महिला के विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की गई है। पुलिस का दावा है कि शराब जब्ती और गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान ही किसी व्यक्ति ने वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है ताकि पुलिस पर दबाव बनाया जा सके और कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जा सकें।
स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी है कि ग्राम खैरी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब के कारोबार की शिकायतें मिलती रही हैं। क्षेत्र के कुछ लोगों का आरोप है कि समय-समय पर पुलिस द्वारा कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हो पाता। वहीं कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि महिला लंबे समय से इस कारोबार में सक्रिय थी तो उसके खिलाफ पहले प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ अभियान लगातार चलाया जाता है और किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाता। अधिकारियों के अनुसार मामले में जब्त की गई शराब, संबंधित दस्तावेज और कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है तथा जांच और कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
फिलहाल वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच पुलिस और स्थानीय लोगों के दावों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच और तथ्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या पोस्ट को बिना सत्यापन के साझा न करें तथा भ्रामक जानकारी फैलाने से बचें। वहीं क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और अफवाहों पर विराम लगेगा।


