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September 12, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर मनोज कुमार पारस का सवाल, ‘ट्रस्ट की जिम्मेदारी तय हो, चंपत राय कब बोलेंगे

लखनऊ, 7 जुलाई उत्तर प्रदेश के नगीना विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनोज कुमार पारस ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर में सामने आई चोरी की घटना ने करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाई है और इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ा विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है। भगवान श्रीराम के मंदिर में चोरी की घटना बेहद गंभीर है और इससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर व्यवस्था संभालने वाले लोग अपनी जिम्मेदारी निभाने में क्यों असफल रहे? जब श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, तब समाज के अनेक वर्गों के लोगों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन ट्रस्ट के गठन के समय उन लोगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। वह स्वयं अनुसूचित समाज से आते हैं और दलित व पिछड़े वर्ग के अनेक लोगों ने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया था, लेकिन ट्रस्ट में इन वर्गों के किसी भी व्यक्ति को स्थान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि जब किसी संस्था या संपत्ति की देखरेख के लिए लोगों की नियुक्ति की जाती है तो यह पूरी जिम्मेदारी उन्हीं लोगों की होती है। ऐसे में यदि मंदिर में इस तरह की घटना हुई है तो इसकी जवाबदेही उन लोगों पर भी बनती है, जिन्हें ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया और जिन्हें मंदिर की व्यवस्था संभालने का दायित्व सौंपा गया।

समाजवादी पार्टी के रुख का बचाव करते हुए मनोज कुमार पारस ने कहा कि सपा की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। न तो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और न ही अखिलेश यादव ने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध किया। यह पूरा मामला न्यायालय के निर्णय से जुड़ा था और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद उसका पालन कराना सरकार की जिम्मेदारी थी। वहीं, फैसला आने से पहले विवादित स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना तत्कालीन सरकार का संवैधानिक दायित्व था, जिसका पालन किया गया।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अब जब मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। हर रोज सोशल मीडिया पर चर्चाएं हो रही हैं, तब भाजपा विपक्ष पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। एसआईटी जांच को लेकर सवाल उठाते हुए पारस ने कहा कि सामान्य प्रक्रिया में पहले प्राथमिकी दर्ज होती है और उसके बाद जांच आगे बढ़ती है, लेकिन इस मामले में पहले एसआईटी का गठन किया गया और बाद में एफआईआर दर्ज हुई। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रही है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से जारी पत्र प्रतिक्रिया देते हुए मनोज कुमार पारस ने कहा कि यह चंपत राय ही बता सकते हैं कि वह कब बोलेंगे। संभवतः उन्हें फिलहाल सार्वजनिक बयान देने से रोका गया है और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनसे तय रणनीति के तहत बयान दिलाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा लव मैरिज को लेकर की गई टिप्पणी पर मनोज कुमार पारस ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर अधिक कुछ नहीं कहना चाहते। संविधान में बालिग होने की आयु निर्धारित है और प्रत्येक व्यक्ति को उसी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप आचरण करना चाहिए। इस मुद्दे पर वह कोई अतिरिक्त टिप्पणी करना उचित नहीं समझते।

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