जबलपुर। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को शहर के मालवीय चौक पर छात्रों ने एकत्र होकर अपनी जीत का जश्न मनाया। छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इसे देशभर के युवाओं की एकजुटता एवं लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया। इस अवसर पर सीजेपी से जुड़ी महिला अधिवक्ता रुचिरा गुप्ता ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यह किसी एक संगठन या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे देश के उन लाखों छात्रों की जीत है जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की।
रुचिरा गुप्ता ने कहा कि हाल ही में हुआ इस्तीफा छात्रों के लंबे संघर्ष का पहला परिणाम है, लेकिन इसे अंतिम जीत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी इस आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य है। जब तक सभी मांगों पर न्यायसंगत कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस पूरे आंदोलन के दौरान जिन 22 छात्रों ने आत्महत्या की, उनके परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन छात्रों की मौतों की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि उन छात्रों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि उनके सपनों और संघर्षों को न्याय दिलाना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
रुचिरा गुप्ता ने आंदोलन में शामिल सभी छात्रों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं ने एकजुट होकर यह साबित कर दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से किया गया संघर्ष बदलाव लाने की ताकत रखता है। उन्होंने छात्रों से संयम और शांति बनाए रखते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया।
मालवीय चौक पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने एक-दूसरे का उत्साहवर्धन किया और न्याय की मांग को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।


