जबलपुर। बीएससी नर्सिंग सत्र 2020-21 के छात्रों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। गुरुवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अपने भविष्य को बचाने की गुहार लगाई। विद्यार्थियों ने कहा कि चार वर्ष में पूरा होने वाला पाठ्यक्रम छह वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। तीसरे वर्ष का परीक्षा परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है, जबकि चौथे वर्ष की परीक्षा भी आयोजित नहीं हो सकी है। लगातार हो रही देरी से उनका करियर अधर में लटक गया है।
छात्रों ने बताया कि दो वर्षों की इस देरी के कारण वे रोजगार और उच्च शिक्षा के कई महत्वपूर्ण अवसरों से वंचित रह गए हैं। स्टाफ नर्स, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और नॉरसेट जैसी भर्तियों में आवेदन करने का अवसर नहीं मिला। वहीं एमएससी नर्सिंग सहित अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की संभावना भी समाप्त हो गई। विद्यार्थियों का कहना है कि वर्ष 2022 से कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में फंसे इस मामले का सबसे अधिक नुकसान उन छात्रों को हुआ है, जिनका किसी विवाद से कोई संबंध नहीं है। उनका आरोप है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं लाई गई।
छात्रों ने जिला कलेक्टर से मांग की कि वे इस मामले में प्रभावी पहल करते हुए राज्य शासन और संबंधित विभागों तक उनकी समस्याएं पहुंचाएं। उन्होंने हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण की शीघ्र सुनवाई कराने, तीसरे वर्ष का परिणाम तत्काल घोषित करने तथा चौथे वर्ष की परीक्षा जल्द आयोजित कराने की मांग की। विद्यार्थियों का कहना है कि वे किसी विशेष राहत की नहीं, बल्कि समय पर अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने भविष्य को सुरक्षित करने के अधिकार की मांग कर रहे हैं।
ज्ञापन के दौरान छात्राओं ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि वर्षों की मेहनत के बावजूद अनिश्चितता के कारण उनका भविष्य दांव पर लगा हुआ है। वहीं डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी ने विद्यार्थियों से ज्ञापन प्राप्त कर उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।


