जबलपुर। कलेक्ट्रेट में अपनी समस्या लेकर पहुंचे एक दिव्यांग छात्र को विभिन्न कमरों के चक्कर लगवाए जाने और उसकी शिकायत का समाधान नहीं होने के मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने प्रथम दृष्टया इसे मानव अधिकारों के हनन का मामला मानते हुए जबलपुर कलेक्टर से दो सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन तलब किया है।
जानकारी के अनुसार तहसील कुण्डम के ग्राम मखराड निवासी दिव्यांग छात्र सुकरन सिंह मरावी ने हाल ही में एक कॉलेज में प्रवेश लिया है। कॉलेज पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण उसे ट्राइसाइकिल से आने-जाने में कठिनाई होती है। इसी वजह से वह शासन की योजना के तहत स्कूटी प्राप्त करने के लिए आवेदन लेकर गत दिनों कलेक्ट्रेट पहुंचा था।
आरोप है कि कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों ने उसे कमरा नंबर 13 से स्टेनो कक्ष, फिर कमरा नंबर 33, 46 और उसके बाद अधीक्षक कक्ष भेज दिया। दोनों पैरों से दिव्यांग छात्र को हाथ और पैरों के सहारे करीब 200 मीटर तक रेंगते हुए विभिन्न कमरों तक जाना पड़ा, लेकिन संबंधित अधिकारी वहां मौजूद नहीं मिले। इसके बाद उसने कलेक्टर से फोन पर संपर्क किया, जिन्होंने उसे अपर कलेक्टर से मिलने की सलाह दी। हालांकि, उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका और वह निराश होकर वापस लौट गया।
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी फरजाना मिर्जा ने बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के आधार पर आयोग ने जनहित में स्वतः संज्ञान लिया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया मानव अधिकारों के हनन का मामला माना है और जबलपुर कलेक्टर को मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।


