जबलपुर। साकेतधाम गौरीघाट में श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय ‘सांख्य योग’ पर आयोजित छह दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के षष्ठम दिवस पर परमहंस स्वामी गिरिशानन्द सरस्वती जी महाराज ने संयम और स्थिर बुद्धि का महत्व बताया।
शाम 5:30 से 6:30 बजे तक आयोजित प्रवचन सत्र में महाराज जी ने कहा कि “जिसकी इन्द्रियां अपने-अपने विषयों से पूरी तरह संयमित हैं, उसी की बुद्धि स्थिर है।” उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि संयम का अर्थ संसार से भाग जाना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए अपने मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना है।
महाराज जी ने समझाया कि भोजन सामने हो, लेकिन आवश्यकता के अनुसार ही ग्रहण करना; धन आए, लेकिन धन का दास न बनना; सम्मान मिले, लेकिन अहंकार न करना; अपमान मिले, लेकिन भीतर से टूट न जाना। इसी प्रकार सुख में आसक्त न होना और दुःख में निराश न होना ही वास्तविक संयम है।
उन्होंने कहा, “जिसके हाथ में संसार है, लेकिन संसार जिसके मन में नहीं है—वही सच्चा योगी है।”
प्रवचन के पूर्व महाराज श्री का पूजन सर्वश्री ब्रजेन्द्र उपाध्याय, रेखा चुडासमा, वंदना मनोज लोहिया, राजेश पटेल, मनीष गुप्ता, रामकुमार पटेल, प्रमिला अग्रवाल, प्रणव पाठक, यश व्यास, अमन दुबे, दिलीप चतुर्वेदी, एस.के. चौरसिया, उमेश पिल्ले, अटल बिहारी, पंकज अग्रवाल, अलभ्य बाजपेयी, भानु नवेरिया, बालकृष्ण अग्रवाल, नलिन पांडेय, रमेश नवेरिया, उमेश नवेरिया, राजेश सोनी, मनीष दुबे सहित श्रद्धालुओं ने किया।


