जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 38.50 लाख रुपए की फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग ठगी के मामले में आरोपी उमेश कांतिलाल पटेल को डिफॉल्ट जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी ने पुलिस द्वारा 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं किए जाने को आधार बनाकर डिफॉल्ट बेल की मांग की थी। जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में IPC की धारा 409 का मूल आरोप एफआईआर में शुरुआत से ही मौजूद है, तो जांच और चार्जशीट दाखिल करने की वैधानिक अवधि 90 दिन होगी, 60 दिन नहीं। कोर्ट ने इसी आधार पर आरोपी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
मामला अनूपपुर जिले के भालूमाड़ा थाना क्षेत्र का है। गुजरात के अहमदाबाद स्थित विवेकानंद नगर निवासी व्यापारी उमेश कांतिलाल पटेल ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। पुलिस ने संतोष कुमार चौरसिया की शिकायत पर उमेश कांतिलाल पटेल और अंकित मालीवाल के खिलाफ 4 दिसंबर 2024 को IPC की धारा 420 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग और निवेश पर दोगुना मुनाफा देने का झांसा देकर 38.50 लाख रुपए की ठगी की गई। जांच के दौरान मामले में IPC की धारा 409 और मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हित संरक्षण अधिनियम की धारा 6 भी जोड़ी गई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिफॉल्ट जमानत के लिए चार्जशीट की अवधि तय करते समय केवल एफआईआर में शुरुआती धाराओं को नहीं, बल्कि मूल अपराध की प्रकृति और गंभीर अपराध बनाने वाले तथ्यों को भी देखा जाएगा। इस आधार पर आरोपी की डिफॉल्ट जमानत की मांग खारिज कर दी गई।


