वॉशिंगटन। अमेरिकी संसद का निचला सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ रूस और ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से जुड़े एक अहम विधेयक पर वोटिंग के लिए तैयार है। इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का व्यापक अधिकार मिल जाएगा। इन लक्षित देशों की सूची में भारत का नाम भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। बिल से जुड़े मुख्य बिंदु और प्रक्रिया विधेयक का नाम: इस कड़े विधेयक को ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ नाम दिया गया है। सीनेट से मिल चुकी है मंजूरी: यह कानून पहले ही अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) से भारी बहुमत के साथ पारित हो चुका है। हाउस में वोटिंग: भारतीय समयानुसार गुरुवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस विधेयक पर मतदान होने की उम्मीद है। सियासी समीकरणों को देखते हुए इस बिल के निचले सदन से भी आसानी से पारित होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। भारत पर प्रभाव: विधेयक के संशोधन प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से भारत सहित चार अन्य देशों को उन राष्ट्रों के रूप में चिन्हित किया गया है, जिन पर रूस के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखने के एवज में अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यदि यह विधेयक पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो यह मॉस्को से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहे देशों और वाशिंगटन के बीच व्यापारिक व कूटनीतिक तनाव को काफी बढ़ा सकता है।


