न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें अधिवेशन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखी और आक्रामक बयानबाजी की। शुक्रवार को महासभा को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Waters Treaty) और ‘कश्मीर’ का राग अलापा। उन्होंने दो टूक धमकी भरे लहजे में कहा कि सिंधु नदी के पानी को रोकने या उसका रुख मोड़ने के भारत के किसी भी प्रयास को पाकिस्तान ‘एक्ट ऑफ़ वॉर’ (युद्ध की कार्रवाई) मानेगा।
शहबाज़ शरीफ़ ने अपने संबोधन में भारत द्वारा सिंधु जल संधि की समीक्षा और संशोधन के कदमों पर ऐतराज जताते हुए कहा: युद्ध की कार्रवाई की चेतावनी: “पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने, उसमें किसी प्रकार की बाधा डालने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई मानेगा। भारत को इसे लेकर किसी मुगालते में नहीं रहना चाहिए।”एकतरफा फैसले को बताया अवैध: उन्होंने दावा किया कि सिंधु नदी पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा (लाइफ लाइन) है और संधि को स्थगित या बदलने के भारत के एकतरफा प्रयासों का कोई कानूनी आधार नहीं है।अंतरराष्ट्रीय मंचों का हवाला: शरीफ़ ने दावा किया कि भारत के दावों को यूएन के विशेषज्ञों और कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने खारिज किया है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि नदियों का इस्तेमाल देशों को जोड़ने और समृद्ध बनाने के लिए होना चाहिए, पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
अपनी घरेलू राजनीति को साधते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उछाला:
‘गले की नस’: शहबाज़ शरीफ़ ने दोहराया कि कश्मीर पाकिस्तान की ‘जुगुलर वेन’ (गले की नस) है और हमेशा रहेगा।
समर्थन का संकल्प: उन्होंने कहा कि जब तक कश्मीरियों को आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक पाकिस्तान उन्हें कूटनीतिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देना जारी रखेगा।भाषण के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत की आंतरिक राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर भी अनर्गल आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत में एक विशेष विचारधारा के प्रभाव के चलते धार्मिक नफरत, भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) और धार्मिक स्थलों पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं।


