कमलनाथ सरकार ने 2019 में 14 से बढ़ाकर किया था 27 प्रतिशत, 159 पन्नों के निर्णय से लंबित भर्तियों पर पड़ेगा असर
जबलपुर। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने 159 पन्नों के निर्णय में OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत की व्यवस्था के अनुरूप रखने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से प्रदेश में सरकारी भर्तियों और लंबे समय से लंबित नियुक्तियों को लेकर नई स्थिति बनने की संभावना है।
वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने अध्यादेश और संशोधन कानून के जरिए OBC आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। विवाद का प्रमुख मुद्दा यह था कि आरक्षण बढ़ने से कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो रहा था। साथ ही, इस सीमा से अधिक आरक्षण को उचित ठहराने के लिए आवश्यक आंकड़ों और असाधारण परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए गए थे।
विवाद के चलते प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं के लिए 87:13 का फॉर्मूला अपनाया गया। इसके तहत 87 प्रतिशत पदों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती रही, जबकि 13 प्रतिशत पदों को अलग रखा गया था। इस व्यवस्था के कारण मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC), कर्मचारी चयन मंडल और अन्य भर्ती एजेंसियों की कई चयन प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं।
फैसले में 29 सितंबर 2022 के बाद 14 प्रतिशत से अधिक OBC आरक्षण के आधार पर की गई नियुक्तियों और पदों के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। वहीं, 29 सितंबर 2022 से पहले 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर नियुक्त अभ्यर्थियों को तत्काल प्रभावित नहीं करने और संबंधित पदों को आगामी भर्ती चरणों में समायोजित करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट के इस निर्णय से शिक्षक भर्ती सहित विभिन्न सरकारी भर्तियों में लंबित चयन और नियुक्ति प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता खुलने की उम्मीद है। हालांकि, अलग-अलग भर्तियों में फैसले का वास्तविक प्रभाव संबंधित रिकॉर्ड और न्यायालय के विस्तृत आदेश में दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित होगा।


