बालाघाट/इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार सादगी पूर्वक विश्व डाक दिवस आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय तथा सदस्य वर्ल्ड पार्लियामेंट, डॉ.कविता गहरवार संस्थानाध्यक्ष, डाॅ.कुलदीप बिल्थरे, राजेन्द्र कुमार ब्रम्हें, दिनेश कुमार नेमा, बलिनन्दर चौहान, राजेश कुमार ब्रम्हे आदि की उपस्थिति में मनाया गया। आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष ने बताया दिनांक 9 अक्टूबर 1969 में टोकियों, जापान में आयोजित एक समारोह में विश्व डाक दिवस के रुप में मनाने का निर्णय हुआ था, विश्व में प्रथम डाक टिकट 1 मई 1840 में “पैनी ब्लैक” के नाम पर जारी किया गया। भारत की आजादी के बाद प्रथम डाक टिकट 21 नवम्बर 1947 को जारी किया गया, जिस पर भारतीय ध्वज का चित्र अंकित तथा जय हिन्द लिखा हुआ था। तदोपरान्त निरन्तर विशिष्ट जनों के नाम पर डाक टिकट जारी होता गया। 21 वीं सदी में बालाघाट मध्यप्रदेश के प्रथम नागरिक इनकी उपलब्धियों पर आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार “वीर” तथा द्वितीय इनकी अर्द्धाग्नी डाॅ.कविता गहरवार के नाम पर भारतीय डाक टिकट जारी हुआ था। आज मोबाईल, इंटरनेट का समय आ गया है। डाक टिकट का महत्व, डाक डब्बा भी 1 सितम्बर 2025 से बन्द करने घोषित हो चुका है और भविष्य चिन्ता का विषय बन गया है। सभी प्रकार के टिकिटों को ज्यादा से ज्यादा संकलित कर भावी पीढ़ियों के लिए यादगार बनाया जा सकता है।


