कचरे के ढेर और उपेक्षा का आरोप, सरकार के नाम भूमि दर्ज करने से लेकर ASI संरक्षण तक की मांग
जबलपुर। शहर की पहचान मानी जाने वाली मदनमहल पहाड़ियों की अनूठी प्राकृतिक धरोहर बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जनहित याचिका दायर कर इस प्राकृतिक संरचना की सुरक्षा और विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। याचिका में आसपास की जमीन निजी स्वामित्व में दर्ज होने, स्थल पर कचरा जमा होने और संरक्षण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं। याचिका रजिस्टर्ड हो चुकी है और अगले सप्ताह सुनवाई संभावित बताई गई है।
मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे की ओर से दायर याचिका में केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश शासन, जबलपुर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। मंच की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा पैरवी कर रहे हैं। उनके अनुसार, बैलेंसिंग रॉक मदनमहल किले से करीब 400 मीटर दूर स्थित विशिष्ट भू-वैज्ञानिक संरचना है, जो अपनी अनूठी बनावट के कारण जबलपुर की पहचान बनी हुई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राजस्व अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की कथित उदासीनता के चलते इस महत्वपूर्ण स्थल के आसपास की जमीन निजी स्वामित्व में दर्ज हो गई। याचिकाकर्ता ने संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराकर स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यकतानुसार जमीन राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की मांग की है।
याचिका में तमिलनाडु के महाबलिपुरम स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक चट्टान कृष्णा बटरबॉल का उदाहरण देते हुए बैलेंसिंग रॉक को भी संरक्षित प्राकृतिक विरासत स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान दिलाने के लिए प्रयास करने का अनुरोध किया गया है।


