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October 29, 2026
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एनीमिया से बचने के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजें, डब्ल्यूएचओ ने दी जरूरी सलाह

नई दिल्ली,  क्या आपको अक्सर थकान महसूस होती है? थोड़ा-सा काम करने पर कमजोरी लगती है या चक्कर आते हैं? इन समस्याओं की एक वजह शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया भी हो सकती है। ऐसे में शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो सकता है, हालांकि सही खानपान और जरूरी पोषक तत्वों की मदद से एनीमिया के कुछ प्रकारों से बचाव किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए एनीमिया से बचाव के लिए जरूरी टिप्स साझा किए हैं। संगठन के मुताबिक, अपनी डाइट में आयरन, फोलेट, विटामिन ए और विटामिन बी12 से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है। इसके लिए दालें, राजमा, छोले, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्जियों को डाइट में शामिल करें। मांसाहारी लोग लीन रेड मीट और मछली जैसी चीजें भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए इसके साथ विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाना फायदेमंद होता है। विटामिन सी शरीर को भोजन से आयरन सोखने में मदद करता है। इसके लिए संतरा, नींबू, अमरूद, आंवला और अन्य विटामिन सी से भरपूर फल खा सकते हैं। उदाहरण के लिए, दाल या हरी सब्जियों के साथ नींबू का रस लेना एक आसान विकल्प है। पालक, मेथी और सरसों जैसी गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।

इनमें फोलेट भी पाया जाता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा गाजर, कद्दू और शकरकंद जैसी नारंगी व पीले रंग की सब्जियां विटामिन ए का अच्छा स्रोत हो सकती हैं। विटामिन बी12 और फोलेट शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के सही निर्माण के लिए जरूरी हैं। मछली, पोल्ट्री और कुछ अन्य पशु-आधारित खाद्य पदार्थ विटामिन बी12 देते हैं। वहीं, दालें, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्जियां फोलेट के अच्छे स्रोत हैं। अगर आपको लगातार थकान, चक्कर, सांस फूलने या कमजोरी जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इन्हें सिर्फ काम का तनाव समझकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर की सलाह से हीमोग्लोबिन और जरूरत के अनुसार अन्य जांच करवाएं। ध्यान रखें कि एनीमिया के सभी मामले केवल खानपान की कमी से नहीं होते। इसके पीछे खून की कमी, पोषक तत्वों की कमी या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण का पता लगाकर इलाज कराना जरूरी है।

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