जबलपुर। करवाचौथ एक ऐसा व्रत है, जिसका सबसे ज्यादा नवविवाहित जोड़ों को इंतजार होता है। इस बार सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि शुक्र ग्रह अस्त होने और भद्रा के कारण जिनका पहला करवाचौथ है, वो व्रत ना करें। नहीं तो अशुभ होगा। ज्योतिषी इन दावों को खारिज कर रहे हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि व्रत को लेकर जो धार्मिक ग्रंथ है, उनमें इस तरह की किसी भी बाधा का उल्लेख नहीं है।
करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर गुरुवार को विशेष शुभ योग में मनाया जाएगा। व्रत सभी सुहागिनों के लिए प्रशस्त और फलदायी है। ज्योतिषाचार्य पंडित कामता प्रसाद तिवारी कहते हैं कि इस वर्ष चतुर्थी तिथि सुबह संकल्प काल से रात्रि चंद्रोदय तक कर्मकाल में पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी। कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि इस वर्ष विवाह होने पर पहली बार करवा चौथ नहीं रखा जा सकता। यह पूर्णतः मिथ्या है। धर्मसिन्धु और निर्णयसिन्धु जैसे धर्मग्रंथों में इस व्रत के लिए किसी प्रकार की बाधा का उल्लेख नहीं है। इस बार करवाचौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का शुभ संयोग व शिवयोग बन रहा है। चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में भ्रमण करेगा। जो दाम्पत्य जीवन में प्रेम और प्रीति बढ़ाने वाला माना गया है। उच्च के चंद्रमा के प्रभाव से पति-पत्नी के बीच वर्ष भर के मनमुटाव समाप्त होते हैं।
चांद निकलने का समय
पं कामता प्रसाद तिवारी के मुताबिक करवाचौथ के पर्व पर भू-पृष्ठीय चंद्रमा का उदय रात 8 बजकर 24 मिनिट पर होगा। यही व्रत का कर्मकाल है। शास्त्र अनुसार जब चंद्रमा क्षितिज से थोड़ा ऊपर उठकर लालिमा युक्त और पूर्ण शीतल दिखाई दे, तभी अर्घ्य देकर पूजा करनी चाहिए। यह जरूर है कि शुक्र उदय के कारण आकाश में बादल और बूंदाबांदी के योग बन रहे हैं, जिससे कई शहरों में चंद्र दर्शन में विलंब हो सकता है।


