रांची, 5 अप्रैल (आईएएनएस)| झारखंड के गिरिडीह जिले के दो लोगों की लाशें विदेश में पड़ी हैं। दोनों ने रोजी-रोटी की खातिर मुल्क छोड़ा था। इनमें से एक कतर और दूसरा ओमान में छोटी-मोटी नौकरी कर रहा था। जिन कंपनियों में ये काम करते थे, वहां से हादसों में इनकी मौत की खबर कई रोज पहले आयी है। लेकिन, इनके शव कैसे आयेंगे इस बारे में कोई बता नहीं रहा। दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गिरिडीह सदर थाना क्षेत्र के चैताडीह ग्राम निवासी मोहम्मद हलीम के 43 वर्षीय पुत्र मोहम्मद कलीम ओमान में इंटरनेशनल मार्बल कंपनी में काम करते थे। परिवार को फोन पर खबर दी गयी कि बीते27 मार्च 2022 को संगमरमर की खदान में चट्टान खिसकने से उनकी मौत हो गयी।उनके बुजुर्ग पिता मोहम्मद हलीम कहते हैं कि कंपनी में बार-बार फोन करने के बाद भी यह नहीं बताया जा रहा है कि शव कब और कैसे आयेगा? रमजान का महीना चल रहा है और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य नहीं रहा। वह चाहते हैं कि किसी तरह उनकी बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच जाये तो शायद उनके बेटे को वतन की मिट्टी नसीब हो जायेगी। पत्नी इशरत परवीन और अपने चारों बच्चों से मोहम्मद कलीम ने कहा था कि ईद के मौके पर घर आयेंगे, पर अब तो उनकी लाश का इंतजार हो रहा है।
गिरिडीह जिले के ही बगोदर थाना अंतर्गत घाघरा ग्राम निवासी 43 वर्षीय गोविंद महतो कतर में इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन कंपनी में मजदूरी करते थे। बीते 24 मार्च को हादसे में उनकी मौत की सूचना घर वालों तक पहुंची। तब से पूरा परिवार सदमे में है। बसंती देवी नहीं जानतीं कि उसके पति की लाश कैसे आयेगी। ग्यारह दिन गुजर गये, पर कंपनी की ओर से कोई सूचना नहीं मिल रही। आलम यह है कि घर के मुखिया की मौत के बाद घर पर चूल्हा तक नहीं जल रहा। प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले सिकंदर अली का कहना है कि जिले के अधिकारियों को इन दोनों घटनाओं की जानकारी दी गयी है, लेकिन अब तक उनकी लाशें वापस लाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।


