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October 28, 2026
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डीएसपी के हौसले देख डर गया था खनन माफिया

हिसार ,21 जुलाई (आरएनएस)। तावडू में हो रहा अवैध खनन बार-बार रुकवाया जाना माफिया को रास नहीं आया और डीएसपी सुरेंद्र सिंह को मौत के घाट उतार दिया गया। डीएसपी का हौसला खनन माफिया को चुभ रहा था। माफिया के गुर्गे खनन क्षेत्र में किसी भी बाहरी व्यक्ति का दखल बर्दाश्त नहीं करते। फिर चाहे वह पुलिस हो या फिर कोई और, माफिया के लोगों ने पहले से ही ऐसी व्यवस्था बना रखी है कि कोई भी बाहर से खनन क्षेत्र में प्रवेश न कर पाए। खनन क्षेत्र के चारों और अवैध हथियारों के साथ युवकों को बैठाया जाता है। असल तो किसी को अंदर जाने ही नहीं दिया जाता, अगर कोई अंदर पहुंच भी जाता है तो यह माफिया के गुर्गों को नागवार गुजरता है। मेवात के डीएसपी सुरेंद्र सिंह के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। माफिया के लोग नहीं चाहते कि अंदर की सच्चाई बाहर आए।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले दस दिनों में डीएसपी सुरेंद्र सिंह यहां पर तीन बार अवैध खनन रुकवा चुके थे। डीएसपी ने चेताया था कि क्षेत्र में अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। बावजूद इसके माफिया ने अवैध खनन जारी रखा। ग्रामीणों द्वारा शिकायत मिलने के बाद बार-बार डीएसपी द्वारा अवैध खनन क्षेत्र में पहुंचना और काम को रुकवाना माफिया के लोगों को अखर गया। इसी को लेकर खनन माफिया के गूर्गों ने डीएसपी को निशाना बनाया। उन्हें इस बात का अहसास हो गया था कि डीएसपी अवैध खनन नहीं चलने देंगे। इसलिए ही मंगलवार को आरोपियों ने पत्थरों से भरा डंपर डीएसपी पर चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस की बार-बार चैकिंग से अवैध खनन का कारोबार प्रभावित हो रहा था।
डीएसपी के स्टाफ ने बरती लापरवाही, कार्रवाई तय
पूरे घटनाक्रम में डीएसपी के साथ गए पुलिस स्टाफ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। डीएसपी की हत्या के बाद डंपर समेत आरोपियों का भाग जाना और पुलिस कर्मचारियों द्वारा बदमाशों पर न तो फायर किए गए और न ही उनको पकडऩे के लिए तत्परता दिखाई गई।  मामले में खुद डीजीपी पीके अग्रवाल और सीआईडी चीफ आलोक मित्तल ने मौके का मुआयना किया था। पुलिस अधिकारी इसे लापरवाही मान रहे हैं। डीएसपी के साथ एएसआई संजय कुमार, पीएसओ उमेश कुमार और चालक अमित कुमार थे। बताया जाता है कि आगामी दिनों में विभागीय स्तर पर इसकी जांच होगी और इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस का पूरा जोर माफिया के सदस्यों की गिरफ्तारी पर है।
बिना नंबर की गाडिय़ों का धड़ल्ले से प्रयोग, उठे सवाल
अवैध खनन में बिना नंबर के डंपर और अन्य गाडिय़ों के प्रयोग से भी जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अवैध खनन रोकने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सभी जिलों में टास्क फोर्स बनाई गए हैं। लेकिन मेवात में धड़ल्ले से बिना नंबर की गाडिय़ों में खनन ले जाया जा रहा था। जिला टास्क फोर्स के साथ-साथ राज्य परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में हैं।

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