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Jabalpur
October 27, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

अनूपपुर में फुटपाथ से सड़क तक कब्जे का आरोप, किराये का खेल या जिम्मेदारों की अनदेखी


*₹300 से ₹500 रोजाना वसूली की शिकायत; राहगीरों की राह बाधित,*दीपावली से पहले संयुक्त जांच और कार्रवाई की मांग*
*सीएमओ भूपेंद्र सिंह ने त्योहार से पहले सर्वे कराकर नियम विरुद्ध कब्जों पर कार्रवाई का दिया भरोसा*
अनूपपुर, चैतन्य मिश्रा, सी टाइम्स। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही जिला मुख्यालय अनूपपुर के बाजारों में भीड़ बढ़ने लगी है। लेकिन बाजार में खरीदारी करने पहुंच रहे नागरिकों के सामने आवागमन की समस्या भी खड़ी हो रही है। शहर के कई हिस्सों में फुटपाथों के साथ सड़क के किनारों पर भी अस्थायी दुकानें लगाए जाने और सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल से रास्ता बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ स्थायी दुकानदार अपनी दुकानों के सामने अस्थायी दुकानें लगवाकर प्रतिदिन ₹300 से ₹500 तक किराया वसूल रहे हैं ,तो मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल और संबंधित विभागों की निगरानी पर भी सवाल खड़े होंगे।
रेलवे स्टेशन चौराहा से बस स्टैंड, सब्जी मंडी, शंकर मंदिर रोड, इंदिरा तिराहा, चेतनानगर और अमरकंटक चौराहे सहित बाजार के विभिन्न हिस्सों में फुटपाथों और सड़क किनारे अस्थायी दुकानें लगाए जाने की शिकायतें हैं। कई स्थानों पर पैदल यात्रियों को फुटपाथ के बजाय सड़क पर चलने की मजबूरी होने की बात सामने आ रही है। दीपावली के दौरान ग्राहकों और वाहनों की संख्या बढ़ने के बीच ऐसी स्थिति यातायात बाधित करने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ा सकती है।
*फुटपाथ जनता के लिए या निजी कमाई का जरिया?*
फुटपाथ का उद्देश्य पैदल यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा देना है, जबकि सड़क का उपयोग सुचारु यातायात के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि सार्वजनिक फुटपाथ या सड़क के हिस्से पर कब्जा कर अस्थायी दुकानें लगाई जा रही हैं, तो इसकी वैधानिक स्थिति की जांच जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि कुछ स्थायी दुकानदार अपनी दुकानों के सामने की सार्वजनिक जगह पर अस्थायी दुकानदारों को बैठने देते हैं और इसके बदले किराया लेते हैं।  संबंधित स्थानों पर दुकान लगाने की कोई वैध अनुमति है या नहीं, अनुमति किस प्राधिकारी ने जारी की है और किसी प्रकार का निर्धारित शुल्क लिया जा रहा है या निजी स्तर पर रकम वसूली जा रही है।
सवाल यह है कि यदि सार्वजनिक जगह पर दुकान लगाने की अनुमति नहीं है, तो वहां लंबे समय तक दुकानें कैसे संचालित हो रही हैं? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या अब तक इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई?
*रोजाना ₹300 से ₹500 वसूली का आरोप, जांच से खुलेगी तस्वीर*
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, कुछ अस्थायी दुकानदारों से प्रतिदिन ₹300 से ₹500 तक किराया लिया जाता है। नगर क्षेत्र में ऐसी 150 से 200 दुकानों के संचालन का प्रारंभिक अनुमान भी सामने आया है। हालांकि, दुकानों की वास्तविक संख्या और किराये की दर की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
यदि 150 से 200 दुकानों की संख्या और ₹300 से ₹500 प्रतिदिन की दर जांच में सही साबित होती है, तो संभावित रकम प्रतिदिन ₹45 हजार से ₹1 लाख तक हो सकती है। इसी आधार पर 30 दिन तक दुकानें संचालित होने की स्थिति में यह राशि ₹13.50 लाख से ₹30 लाख प्रतिमाह तक पहुंच सकती है।
यह गणना केवल उपलब्ध अनुमान और कथित दरों पर आधारित है। दुकानों की संख्या, संचालन के दिनों, भुगतान की दर, संबंधित व्यक्तियों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
*दुकानदारों की आपबीती,बोलेंगे तो दुकान हटवा दी जाएगी!*
फुटपाथ पर अस्थायी दुकान लगाने वाले कुछ दुकानदारों से चर्चा के दौरान उन्होंने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कथित किराया वसूली की बात कही। उनका कहना है कि वे नगरपालिका को किराया देने के बजाय जिस स्थायी दुकान के सामने अपनी दुकान लगाते हैं, उसी दुकानदार को रकम देते हैं।
कुछ दुकानदारों ने यह आशंका भी जताई कि यदि वे खुलकर बयान देंगे, तो उन्हें वहां से हटाया जा सकता है। यदि सार्वजनिक जगह पर दुकान लगाने के बदले निजी स्तर पर किराया लिया जा रहा है, तो प्रशासन को यह जांचना चाहिए कि रकम लेने वाले व्यक्तियों के पास ऐसा करने का कोई वैधानिक अधिकार है या नहीं। छोटे व्यापारियों की आजीविका का सम्मान जरूरी है, लेकिन सार्वजनिक रास्तों पर कब्जे के कारण आम नागरिकों के आवागमन को बाधित नहीं होने दिया जा सकता।
*नगरपालिका, यातायात प्रभारी और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय हो*
इस मामले में नगरपालिका, यातायात पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। तीनों विभागों के बीच समन्वय से ही अतिक्रमण, यातायात अवरोध और कथित किराया वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो सकती है।
नगरपालिका प्रशासन फुटपाथों, सड़क किनारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों का स्थल निरीक्षण कर अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति दर्ज करे। अस्थायी दुकानों के लिए जारी अनुमति, निर्धारित शुल्क, रसीदों और संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच की जाए। यदि सार्वजनिक संपत्ति पर नियम विरुद्ध कब्जा या अनधिकृत किराया वसूली सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
यातायात प्रभारी रेलवे स्टेशन चौराहा, बस स्टैंड, सब्जी मंडी और प्रमुख बाजार मार्गों पर यातायात की स्थिति का आकलन करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि फुटपाथ और सड़क किनारे लगने वाली दुकानें पैदल यात्रियों तथा वाहनों के आवागमन में बाधा न बनें। दीपावली के दौरान भीड़ को देखते हुए आवश्यक यातायात व्यवस्था और निगरानी भी की जाए।
पुलिस प्रशासन कथित किराया वसूली की शिकायतों की तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच करे। आवश्यकता के अनुसार संबंधित लोगों से पूछताछ की जाए और यदि किसी दंडनीय कृत्य के प्रमाण मिलते हैं, तो लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
सवाल यह भी है कि यदि सार्वजनिक फुटपाथों और सड़क किनारों पर लंबे समय से ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो अब तक कितने निरीक्षण किए गए और कितने मामलों में कार्रवाई हुई? संबंधित विभागों को इस संबंध में तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
*सीएमओ भूपेंद्र सिंह का बयान,त्योहार से पहले होगा सर्वेऔर हटेगा अतिक्रमण*
मुख्य नगर पालिका अधिकारी भूपेंद्र सिंह, अनूपपुर ने कहा कि त्योहार से पहले फुटपाथों और सड़कों पर किए गए कब्जों का सर्वे कराया जाएगा। यदि शासकीय संपत्ति पर नियम विरुद्ध तरीके से किराया वसूले जाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनसम्मत प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने फुटपाथों और सड़कों को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराने की बात भी कही।सीएमओ के इस बयान के बाद अब निगाहें नगरपालिका प्रशासन की वास्तविक कार्रवाई पर टिकी हैं। सर्वे कब शुरू होगा, किन-किन स्थानों को इसमें शामिल किया जाएगा, कथित किराया वसूली की जांच किस प्रकार होगी और अतिक्रमण हटाने के लिए क्या समयसीमा निर्धारित की जाएगी ,इन सवालों पर स्पष्टता जरूरी है। साथ ही, सड़क के किनारों पर आवागमन बाधित करने वाली गतिविधियों को भी सर्वे के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए।
*दीपावली से पहले फुटपाथ और सड़क के लिए संयुक्त अभियान जरूरी*
त्योहार के दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ने से पहले नगरपालिका, यातायात पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन को संयुक्त निरीक्षण करना चाहिए। कार्रवाई केवल अस्थायी दुकानदारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी जांचा जाना चाहिए कि कहीं कोई स्थायी दुकानदार सार्वजनिक फुटपाथ या सड़क के हिस्से पर दुकान लगवाने के बदले नियम विरुद्ध किराया तो नहीं वसूल रहा है।जांच में आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित व्यक्ति की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, जरूरतमंद छोटे व्यापारियों के लिए वैकल्पिक और निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित किए बिना आम नागरिकों का रास्ता सुरक्षित रखा जा सके।
*अब जनता पूछ रही है फुटपाथ और सड़क कब होंगे अतिक्रमण मुक्त?*
अनूपपुर के नागरिकों के लिए फुटपाथ और सड़क सार्वजनिक आवागमन के महत्वपूर्ण साधन हैं। इन पर किसी भी तरह की अनधिकृत गतिविधि से आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यदि सार्वजनिक जगहों पर कब्जा कर किराया वसूली की जा रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करना आवश्यक है।क्या नगरपालिका प्रशासन, यातायात प्रभारी और पुलिस प्रशासन मिलकर कथित किराया वसूली की जांच करेंगे? क्या सार्वजनिक जगह पर दुकान लगवाकर रकम लेने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी? क्या फुटपाथों के साथ सड़क के किनारों को भी अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा? और सबसे अहम सवाल,क्या दीपावली से पहले राहगीरों को सुरक्षित रास्ता मिल पाएगा, या कार्रवाई का भरोसा केवल बयान तक सीमित रह जाएगा?
*अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं* बल्कि समयबद्ध सर्वेक्षण, निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार ठोस कार्रवाई की है। सार्वजनिक रास्तों को सुरक्षित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि त्योहार की खरीदारी के बीच नागरिकों को सड़क पर जान जोखिम में डालकर चलने की मजबूरी न हो।

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