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August 30, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

केटीआर ने हिंदी थोपने का विरोध करते हुए पीएम को पत्र लिखा

हैदराबाद 13 Oct. (Rns) । तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के.टी. रामाराव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय विश्वविद्यालय समेत सभी तकनीकी और गैर-तकनीकी शिक्षण संस्थानों में हिंदी को शिक्षा का माध्यम बनाने के कदम का कड़ा विरोध किया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में राजभाषा पर संसद की एक समिति ने सिफारिश की कि तकनीकी और गैर-तकनीकी शिक्षण संस्थानों में हिंदी को शिक्षा का माध्यम बनाया जाए। यह कहते हुए कि सिफारिश असंवैधानिक है, रामा राव ने सिफारिश को वापस लेने की मांग की।

लोकप्रिय मंत्री केटीआर ने पीएम को लिखे अपने पत्र में कहा, वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के भविष्य पर असंवैधानिक सिफारिश का दूरगामी विनाशकारी प्रभाव, भारत के विभिन्न हिस्सों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बीच यह विभाजन पैदा कर सकता है।

हिंदी को अप्रत्यक्ष रूप से थोपने से करोड़ों युवाओं का जीवन कैसे बर्बाद हो रहा है, इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि जो छात्र क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, वह केंद्र सरकार की नौकरी के अवसरों को खो रहे हैं, क्योंकि केंद्रीय नौकरियों के लिए योग्यता परीक्षा में प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी में हैं। लगभग 20 केंद्रीय भर्ती एजेंसियां हैं जो हिंदी और अंग्रेजी में परीक्षा आयोजित करती हैं। यूपीएससी दो भाषाओं में राष्ट्रीय पदों के लिए 16 भर्ती परीक्षा आयोजित करता है।

केटीआर, जो तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने कहा कि “केंद्रीय भर्ती एजेंसियों से नौकरी की घोषणा दुर्लभ है और सीमित भर्ती अभियान क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है। नौकरी की चाहत रखने वाले करोड़ों युवाओं के साथ हो रहे इस अन्याय को मैंने खत्म किया है। मैंने प्रधानमंत्री से नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लाभ के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित करने का अनुरोध किया है।”

केटीआर ने लिखा, इसके अलावा इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वैश्वीकृत दुनिया में, राजभाषा पर संसद की समिति की सिफारिश हमें राष्ट्र के विकास के मामले में पीछे ले जा सकती है। भारत में बड़ी गैर-हिंदी भाषी आबादी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी को अनिवार्य बनाने के केंद्र सरकार के कदम से देश में सामाजिक-आर्थिक विभाजन होगा।

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