हैदराबाद, 27 सितंबर । तेलंगाना सरकार को झटका देते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इस साल 11 जून को तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (टीएसपीएससी) की ग्रुप-1 प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति अभिनंद कुमार शविली और न्यायमूर्ति अनिल कुमार जुकांति की खंडपीठ ने टीएसपीएससी को फिर से परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा।
टीएसपीएससी ने परीक्षा रद्द करने के न्यायमूर्ति पी माधवी देवी के 23 सितंबर के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
डिवीजन बेंच ने प्रश्नपत्र लीक के कारण पहली परीक्षा रद्द होने के बावजूद उचित सावधानी नहीं बरतने के लिए टीएसपीएससी की खिंचाई की। कोर्ट ने परीक्षा आयोजित करने के तरीके पर निराशा जताई।
अदालत ने टीएसपीएससी से पूछा कि अधिसूचना के माध्यम से इसकी घोषणा करने के बावजूद वह बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने में क्यों विफल रही। पीठ ने यह भी पूछा कि टीएसपीएससी ने उसकी अधिसूचना का उल्लंघन क्यों किया।
लाखों बेरोजगारों ने लंबे इंतजार के बाद परीक्षा दी थी। अदालत ने टिप्पणी की कि जिस तरह से परीक्षा आयोजित की गई, उससे उनकी उम्मीदें धराशायी हो गई। कोर्ट ने बेरोजगारों के जीवन से खिलवाड़ करने के लिए टीएसपीएससी की खिंचाई की।
इससे पहले एकल न्यायाधीश ने परीक्षा रद्द कर दी थी। अदालत ने कुछ उम्मीदवारों के परीक्षा के संचालन में घोर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दायर याचिकाओं पर आदेश पारित किया था।
उन्होंने शिकायत किया कि बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू नहीं की गई और ओएमआर शीट में उम्मीदवारों के हॉल टिकट नंबर एवं तस्वीरें नहीं थीं।
503 ग्रुप-1 पदों पर भर्ती के लिए 11 जून को आयोजित परीक्षा में 2.32 लाख से अधिक सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार शामिल हुए थे। यह दूसरी बार था जब परीक्षा रद्द की गई। इससे पहले परीक्षा 16 अक्टूबर 2022 को आयोजित की गई थी।
परीक्षा में करीब 2.86 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। हालांकि, टीएसपीएससी ने प्रश्नपत्र लीक होने के कारण मार्च में परीक्षा रद्द कर दी थी, जिससे आयोग को झटका लगा था। कथित तौर पर अपने ही कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता वाले घोटाले के कारण टीएसपीएससी को कई अन्य भर्ती परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी।


