मध्य प्रदेश सरकार ने 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना को राज्य का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है। वे 1 दिसंबर 2024 को इस पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे, जब वर्तमान डीजीपी सुधीर सक्सेना सेवानिवृत्त होंगे। तेज़-तर्रार और कड़ी मेहनत के लिए पहचाने जाने वाले कैलाश मकवाना प्रदेश के 32वें डीजीपी होंगे। उनके कार्यकाल को लेकर कानून व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार पर सख्ती की उम्मीद जताई जा रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम
कैलाश मकवाना को उनके बेदाग करियर और भ्रष्टाचार विरोधी छवि के लिए जाना जाता है। शिवराज सरकार के कार्यकाल में जब उन्हें लोकायुक्त का डीजी नियुक्त किया गया, तो उन्होंने कई ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलों को फिर से खोला और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। महाकाल लोक कॉरिडोर के मामले में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
हालांकि, लोकायुक्त में उनके कड़े फैसलों के चलते उन्हें महज छह महीने में हटा दिया गया और पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बावजूद, उनकी सख्त और निष्पक्ष छवि ने उन्हें हमेशा एक जिम्मेदार अधिकारी के रूप में स्थापित किया।
अहम पदों पर सेवाएं और करियर के उतार-चढ़ाव
अपने करियर के दौरान मकवाना ने साढ़े तीन वर्षों में सात बार ट्रांसफर झेले। कमलनाथ सरकार के दौरान उनका तीन बार स्थानांतरण हुआ। उन्होंने एडीजी इंटेलिजेंस, एडीजी नारकोटिक्स, एडीजी सीआईडी, और एडीजी प्रशासन जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं।
2021 में उन्हें मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया। 2022 में, जब वे लोकायुक्त के डीजी थे, तो उनकी गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) को खराब कर दिया गया। इस पर उन्होंने सरकार से अपील की, और निर्णय उनके पक्ष में गया। इस बार डीजीपी की नियुक्ति के लिए बनाए गए पैनल में उनका नाम सबसे ऊपर था।
शैक्षणिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
उज्जैन के निवासी कैलाश मकवाना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उज्जैन से पूरी की और बाद में मैनिट, भोपाल से बीई और आईआईटी दिल्ली से एमटेक की डिग्री प्राप्त की। उनका शैक्षिक और पेशेवर जीवन उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने दुर्ग, मुरैना, जबलपुर, रायपुर, दंतेवाड़ा, मन्दसौर, और सागर जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दीं। इंटेलिजेंस विभाग में भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं।
भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं
कैलाश मकवाना का कार्यकाल 30 नवंबर 2026 तक रहेगा। उनकी नियुक्ति के साथ 1990 बैच तक के अफसर डीजीपी बनने से वंचित रहेंगे। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश पुलिस से यह उम्मीद की जा रही है कि भ्रष्टाचार पर सख्ती से नकेल कसी जाएगी और कानून व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा।
उनकी साफ-सुथरी छवि, कार्य के प्रति समर्पण, और कुशल प्रशासनिक क्षमता ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। मध्य प्रदेश की जनता उनके कार्यकाल में पुलिस व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद कर रही है।


