नो प्रॉफिट-नो लॉस पर सरकार की नई पहल: जबलपुर सहित 7 शहरों में फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें
यदि बस सुविधा न हो तो आम लोगों को महंगी यात्रा, घंटों इंतजार और असुरक्षित सफर जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं का समाधान करने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है, जिससे यात्रा सुगम, सस्ती और सुरक्षित हो सकेगी।
फिर सड़कों पर दिखेंगी सरकारी बसें
मध्य प्रदेश में वर्षों बाद एक बार फिर सरकारी बसों की रफ्तार सड़कों पर लौटेगी। राज्य सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बस सेवा शुरू करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। पहले राज्य परिवहन निगम के बंद होने और निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी से यात्री लगातार परेशान थे। अब इन समस्याओं से राहत देने के लिए मोहन सरकार ने यह नई पहल की है।
पहला चरण: इन 7 शहरों से होगी शुरुआत
योजना के पहले चरण में बस सेवाएं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा और सागर शहरों से शुरू की जाएंगी। ये वे इलाके हैं जहां यात्रियों की संख्या अधिक है लेकिन निजी बस सेवाएं अव्यवस्थित या सीमित हैं। चयनित रूट ऐसे होंगे जहां सार्वजनिक परिवहन की भारी कमी है।
लाभ कमाने नहीं, सेवा देने का उद्देश्य
परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि यह सेवा पूरी तरह “नो प्रॉफिट-नो लॉस” सिद्धांत पर आधारित होगी। यानी इसका मकसद आमजन को सस्ती, सुरक्षित और नियमित परिवहन सुविधा देना है—not कमाई करना।
स्मार्ट टेक्नोलॉजी से होगी निगरानी
हर बस में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और AI आधारित निगरानी प्रणाली होगी। टिकटिंग के लिए हैंड-हेल्ड मशीनें दी जाएंगी। संचालन और टिकटिंग का जिम्मा अलग-अलग एजेंसियों को सौंपा जाएगा। राज्य और जिला स्तर पर निगरानी कमेटियां बनाई जाएंगी ताकि किसी भी समस्या का समाधान शीघ्रता से हो सके।
बसें सरकार नहीं, निजी ऑपरेटर लाएंगे
सरकार खुद कोई बस नहीं खरीदेगी, बल्कि निजी ऑपरेटरों से बसें किराए पर लेकर चलाई जाएंगी। साथ ही यात्रियों के लिए सामान ढुलाई की भी सुविधा दी जाएगी। एक मोबाइल एप भी तैयार किया जा रहा है, जो अलग-अलग ट्रांसपोर्ट सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर लोगों को बेहतर सुविधा देगा।


