Human trafficking racket busted at Tinsukia railway station – असम के तिनसुकिया रेलवे स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों ने एक बड़े मानव तस्करी रैकेट को बेनकाब करते हुए 26 नाबालिग लड़कियों और युवतियों को रेस्क्यू किया है। ये सभी लड़कियां फर्जी दस्तावेजों के जरिए तमिलनाडु ले जाई जा रही थीं।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRPF) की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई एक रूटीन चेकिंग के दौरान की। मौके से पांच लोगों (महिला और पुरुष) को हिरासत में लिया गया है, जो मानव तस्करी गिरोह के सदस्य बताए जा रहे हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में एक आरोपी, बिद्युत दत्ता, ने दावा किया कि ये लड़कियां तमिलनाडु के एक टेक्सटाइल फैक्ट्री में काम करने जा रही थीं। हालांकि, अधिकारी इस दावे को लेकर सतर्क हैं और इस पूरे रैकेट की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।
असम में मानव तस्करी का संकट गहराता
अपर असम, खासकर चाय बागान क्षेत्रों में, मानव तस्करी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। यहां गरीब और असुरक्षित परिवारों को झूठे नौकरी और आर्थिक मदद के वादों से फंसाया जाता है, और फिर लड़कियों को दूसरे राज्यों में शोषणकारी श्रम या अन्य घातक परिस्थितियों के लिए भेज दिया जाता है।
राज्य सरकार की नई नीति: मानव तस्करी और डायन प्रथा पर फोकस
हाल ही में असम सरकार ने मानव तस्करी और डायन प्रथा पर लगाम लगाने के लिए एक व्यापक राज्य नीति जारी की है। यह नीति महिलाओं और लड़कियों को विशेष रूप से प्रभावित करने वाले इन अपराधों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात करती है।
राज्य की रणनीतिक स्थिति — छह पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश व भूटान की सीमा से सटे होने के कारण — तस्करी को और जटिल बना देती है।
राज्य पहले ही “Witch Hunting (Prohibition, Prevention and Protection) Act, 2018” लागू कर चुका है, जो डायन प्रथा को एक गंभीर, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य अपराध घोषित करता है।
नीति के प्रमुख बिंदु:
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तस्करी रोकथाम, पीड़िता की सुरक्षा व पुनर्वास
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अपराधियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई
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राज्य, जिला और ग्राम पंचायत स्तर तक कमेटियों का गठन
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महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है
सरकार का उद्देश्य है कि हर नागरिक बिना डर के अपने अधिकारों और सेवाओं का लाभ उठा सके और एक सुरक्षित, समावेशी समाज की ओर बढ़ सके।


