मुंबई ,04 अगस्त। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक 60 वर्षीय ट्यूशन शिक्षक को जमानत दे दी है, जिसे इस साल की शुरुआत में एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीडऩ के आरोप में पॉक्सो कोर्ट ने दोषी ठहराया था। जमानत देते हुए जस्टिस सारंग वी. कोटवाल की अदालत ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए कि पीडि़ता को संभवत: सिखा-पढ़ाकर बयान दिलाया गया था। कोर्ट ने इस तथ्य पर विशेष गौर किया कि जिरह के दौरान लड़की ने खुद यह स्वीकार किया था कि उसकी पुलिस कांस्टेबल माँ ने उसे ट्रायल कोर्ट में सवालों के जवाब देने का तरीका सिखाया था।
यह मामला 15 मार्च, 2017 का है। पीडि़ता उस समय चौथी कक्षा की छात्रा थी और अपनी बड़ी बहन के साथ आरोपी शिक्षक के पास ट्यूशन पढऩे जाती थी। लड़की की माँ द्वारा 19 मार्च, 2017 को दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, शिक्षक ने लड़की को अपने कमरे में बुलाकर किताब पढऩे को कहा और फिर उसे गलत तरीके से छुआ। शिकायत में कहा गया कि लड़की डरकर बगल के कमरे में चली गई, जहाँ शिक्षक की पत्नी भी क्लास ले रही थी।
इसी साल 9 जनवरी, 2025 को एक विशेष पॉक्सो अदालत ने शिक्षक को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 और भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत दोषी पाते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों पर किया गौर
सुनवाई के दौरान, शिक्षक के वकील सत्यव्रत जोशी ने दलील दी कि क्लास में न आने पर डांट पडऩे के बाद पीडि़ता ने रंजिश में शिक्षक को झूठा फंसाया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि घटना के समय शिक्षक की पत्नी घर में ही मौजूद थी, जिससे ऐसे किसी अपराध की संभावना न के बराबर हो जाती है।
हाईकोर्ट ने शिक्षक के वकील की दलीलों और पीडि़ता के बयान में विरोधाभासों पर गौर किया। अदालत ने कहा, यह मानना बेहद मुश्किल है कि अपनी माँ को इतनी गंभीर घटना की जानकारी देने के बावजूद लड़की अगले ही दिन यानी 16 मार्च को फिर से ट्यूशन क्लास में गई। अदालत ने पीडि़ता के गोलमोल जवाबों को देखते हुए कहा कि यह इस तर्क को बल देता है कि कथित घटना सच नहीं हो सकती है।
अभियोजन पक्ष ने किया था जमानत का विरोध
अभियोजन पक्ष ने यह कहते हुए जमानत का पुरजोर विरोध किया कि एक 10 साल की बच्ची अपने शिक्षक के खिलाफ ऐसे गंभीर आरोप नहीं लगा सकती। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों और मामले के तथ्यों को तरजीह दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन सभी सवालों पर अंतिम फैसला अपील की सुनवाई के दौरान किया जाएगा। फिलहाल, कोर्ट ने दोषी शिक्षक को 25,000 रुपये के मुचलके पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।


