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June 19, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

अमेरिकी टेक फर्मों ने अपने एच-1बी वीजा वाले कर्मचारियों से रविवार की डेडलाइन से पहले अमेरिका वापस लौटने का किया आग्रह

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trump h1b visa policy 20 सितंबर । माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी टेक फर्मों ने एच-1बी वीजा वाले अपने उन कर्मचारियों को जो अभी अमेरिका के बाहर हैं, तुरंत अमेरिका वापस लौटने की सलाह दी है। कंपनी द्वारा यह सलाह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस लागू होने की 21 सितंबर की डेडलाइन से पहले दी गई है।

अमेरिकी प्रशासन ने सभी वीजा पर सालाना 1 लाख डॉलर की फीस लगाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह नया नियम 21 सितंबर से लागू होगा और 12 महीने तक रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियों ने अमेरिका में मौजूद अपने एच-1बी वीजा कर्मचारियों को आने वाले समय में देश में ही काम जारी रखने और आगे नए निर्देश मिलने तक अंतरराष्ट्रीय यात्रा न करने का निर्देश दिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने कथित तौर पर एच-4 वीजा धारकों को भी अमेरिका में ही रहने की सलाह दी है।

कंपनी ने कहा, “हम एच-1बी वीजा और एच-4 वीजा धारकों को कल डेडलाइन से पहले अमेरिका वापस लौटने की सलाह देते हैं।” माइक्रोसॉफ्ट या जेपी मॉर्गन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को उम्मीद है कि इस नए वीजा प्रोग्राम से अमेरिकी खजाने को 100 बिलियन डॉलर से अधिक मिलेंगे, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय कर्ज कम करने और टैक्स में कटौती के लिए किया जाएगा। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि नई फीस से प्रतिभा की आवाजाही में रुकावट आएगी और इनोवेशन कम होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 71 प्रतिशत एच-1बी वीजा धारक भारत से हैं, जो मुख्य रूप से इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों में काम करते हैं। अमेरिका में लिस्टेड भारतीय कंपनियों सहित प्रमुख आईटी सर्विस फर्मों के शेयर इस घोषणा के बाद 2 से 5 प्रतिशत तक गिर गए।

एच-1बी वीजा आमतौर पर तीन साल के लिए वैलिड होता है और अगले तीन अतिरिक्त साल के लिए रिन्यू किए जा सकते हैं। ऐसे में, नई 1 लाख डॉलर की सालाना फीस से भारतीय पेशेवरों को बनाए रखना कंपनियों के लिए महंगा हो सकता है, खासकर जब ग्रीन कार्ड के लिए दशकों का इंतजार करना पड़ता है। एच-1बी प्रोग्राम अमेरिकी कंपनियों को टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में कुशल विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है।

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