July 26, 2026
सी टाइम्स
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तमिलनाडु: राज्य सरकार ने कार्तिगई दीपम मुद्दे पर कोर्ट के आदेश को दी चुनौती

मदुरै, 4 दिसंबर। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के आदेश को चुनौती दी है। सरकार ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि जस्टिस स्वामीनाथन ने थिरुपरनकुंद्रम हिल पर सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में कार्तिगई दीपम जलाने का आदेश अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दिया है।

मदुरै, 4 दिसंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के आदेश को चुनौती दी है। सरकार ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि जस्टिस स्वामीनाथन ने थिरुपरनकुंद्रम हिल पर सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में कार्तिगई दीपम जलाने का आदेश अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दिया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक याचिका दायर की गई जिसमें पहाड़ी के लैंप पोस्ट पर पारंपरिक कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति मांगी गई थी।

याचिका पर सुनवाई करते हुए, जज ने निर्देश दिया कि महा दीपम पहाड़ी की चोटी पर जलाया जाए और मंदिर प्रशासन से इंतजाम करने को भी कहा। हालांकि बुधवार सुबह शुरुआती तैयारियां की गई थीं, लेकिन मंदिर अधिकारियों ने अचानक इंतजाम रद्द कर दिए।

इसे वापस लेने पर हिंदू मक्कल काची, अखिल भारत हनुमान सेना, साउथ इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और दूसरे संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। याचिकाकर्ता के आग्रह अनुसार लैंप पोस्ट पर दीया जलाने की मांग करते हुए मार्च किया।

हालांकि, मंदिर की परंपरा के मुताबिक, शाम 6 बजे पहाड़ी की चोटी पर उच्चिपिल्लैयार मंदिर के पास दीपम जलाया गया, लैंप पोस्ट पर नहीं। इससे संतुष्ट न होने पर, याचिकाकर्ता और दूसरों ने अनुरोध किया कि सीआईएसएफ की मौजूदगी में कार्य सम्पन्न कराया जाए।

इसके बाद जस्टिस स्वामीनाथन ने उन्हें सुरक्षा बल के साथ मौके पर जाने की अनुमति देते हुए एक आदेश पारित किया।

कथित तौर पर बुधवार शाम को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भाजपा और हिंदू संगठन के सदस्यों ने 16 फुट हॉल के पास नारे लगाए और बैरिकेड तोड़कर पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने दखल दिया, जिससे झड़प हुई और दो पुलिसवाले घायल हो गए।

बिगड़ते हालात को देखते हुए, जिला कलेक्टर प्रवीण कुमार ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी। कई प्रदर्शनकारियों को पाबंदियों का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया। बाद में कुछ समूहों ने रास्ते पर कपूर जलाया और जाने से पहले पूजा-पाठ किया।

राज्य सरकार ने तुरंत मदुरै बेंच के प्रशासनिक जज, जस्टिस जयचंद्रन, से संपर्क किया और एकल जज के ऑर्डर को सस्पेंड कर पलटने की मांग की।

अतिरिक्त मुख्य लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि जज के पास सीआईएसएफ की तैनाती को लेकर आदेश देने का अधिकार नहीं था। इस औद्योगिक बल को यहां पब्लिक ऑर्डर बनाए रखने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ हाई कोर्ट परिसर की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया है।

राज्य ने आगे कहा कि इस ऑर्डर से थिरुपरनकुंद्रम में सांप्रदायिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा। साथ ही, कलेक्टर ने याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर रोक लगाने की मांग करते हुए एक और याचिका डाली।

दोनों मामलों को जस्टिस जयचंद्रन और रामकृष्णन ने दिन के पहले केस के तौर पर लिया। राज्य ने तर्क दिया कि मंदिर प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई उन्हें सुने बिना नहीं की जा सकती, और अवमानना की कार्रवाई से केस फाइल करने के उसी दिन तुरंत सजा नहीं हो सकती।

राज्य ने कोर्ट से सिंगल जज के निर्देशों को रद्द करने की अपील यह कहते हुए कि वे न्यायिक अधिकार से बाहर थे और इससे इलाके में तनाव बढ़ गया था

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