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June 10, 2026
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पुलिस डायरीज: खाकी की ‘उड़ान’: कोर्ट के 4 साल के संघर्ष से लेकर कोरोना काल में ‘मसीहा’ बनने तक, कहानी पल्लवी शुक्ला जी की

MPPSC पास किया, फिर रिजल्ट रद्द हुआ: 4 साल कोर्ट में लड़कर ऐसे बनीं पुलिस अफसर

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अक्सर हम पुलिस की वर्दी और उसके रौब को देखते हैं, लेकिन उस वर्दी के पीछे छिपे संघर्ष, मानवीय संवेदनाओं और एक बेटी के सपनों को नहीं देख पाते। ‘सी टाइम्स’ के ‘पुलिस डायरीज’ कार्यक्रम में हमारी मुलाकात एक ऐसी ही शख्सियत, जबलपुर की एडिशनल एसपी पल्लवी शुक्ला से हुई, जिनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा प्रेरणादायक है।

महू की गलियों से खाकी तक का सफर
इंदौर के पास महू के एक साधारण संयुक्त परिवार में, जहाँ पाँच बहनें साथ पली-बढ़ीं, पल्लवी जी ने बचपन से ही ‘उड़ान’ सीरियल की कल्याणी सिंह (किरण बेदी) को देखकर पुलिस अफसर बनने का सपना बुना। उनका उद्देश्य महज नौकरी पाना नहीं, बल्कि उन कुरीतियों और अन्याय के खिलाफ खड़ा होना था, जिनसे महिलाएं और बच्चियां अक्सर जूझती हैं।

जब सपनों पर लगा ग्रहण, पर नहीं हारी हिम्मत
जीवन में असली परीक्षा तब होती है जब जीत कर भी हार मिल जाए। पल्लवी जी का चयन एमपीपीएससी (MPPSC) में डीएसपी पद के लिए हुआ, लेकिन एक महीने बाद ही रिजल्ट बदल दिया गया। जिस सपने को पूरा हुआ मान लिया था, वह पल भर में ओझल हो गया। लेकिन पल्लवी जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने हक के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 4 साल की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः सत्य की जीत हुई। यह जिद्द और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही है जो उन्हें आज इस मुकाम पर लाया है।

कोरोना काल में ‘फरिश्ता’ और अपराधियों के लिए ‘काल’
एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी संवेदनशीलता कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देखने को मिली। जब रेमडेसिविर इंजेक्शन और ब्लैक फंगस की दवाओं की कालाबाजारी चरम पर थी, पल्लवी जी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए खुद ‘फर्जी ग्राहक’ बनकर जाल बिछाया। एक मजबूर परिवार की मदद के लिए उन्होंने कालाबाजारियों को रंगे हाथों पकड़ा। उनका यह कदम साबित करता है कि पुलिस सिर्फ कानून का डंडा नहीं, बल्कि मानवता का सहारा भी है। सुसनेर में गांजा तस्करों के खिलाफ टायर में छिपाए गए मादक पदार्थों को पकड़ना उनकी चतुराई और सटीक सूचना तंत्र का प्रमाण है।

फाइल (FILE) ही किसी की लाइफ (LIFE) है
पल्लवी जी का अपने अधीनस्थों को दिया गया संदेश हर लोक सेवक के लिए एक मूलमंत्र होना चाहिए। वे कहती हैं कि किसी पीड़ित की ‘FILE’ को अगर उल्टा पढ़ा जाए तो वह ‘LIFE’ बन जाती है। इसलिए हर आवेदन को कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जिंदगी समझकर सुलझाना चाहिए।

युवाओं के लिए उनका संदेश स्पष्ट है: सोशल मीडिया के मायाजाल और नशे की लत से बचें। आज की डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सुरक्षा है। पल्लवी शुक्ला जी का जीवन यह सिखाता है कि यदि इरादे नेक हों और हौसले बुलंद, तो नर्मदा की धारा की तरह विपरीत परिस्थितियों में भी अपना रास्ता बनाया जा सकता है।

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