करोड़ों की बैंक डकैती और आतंक का कनेक्शन: जुर्म की दुनिया के रोंगटे खड़े करने वाले किस्से
आतंकियों के नेटवर्क से लेकर शातिर लुटेरों तक: एक पुलिस अफसर के सबसे खतरनाक अनुभव
जबलपुर। “अपराध अब केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि हमारे मोबाइल स्क्रीन और बंद कमरों में भी घटित हो रहा है।” यह कहना है जबलपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (क्राइम) श्री जितेंद्र सिंह का। सी टाइम्स के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘पुलिस डायरीज’ में श्री सिंह ने अपने जीवन के अनछुए पहलुओं और वर्तमान में पुलिस के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती—’साइबर क्राइम’—पर विस्तार से चर्चा की।
इंजीनियरिंग से पुलिस सेवा तक का सफर
मूलतः भिंड के रहने वाले और प्रशासनिक पृष्ठभूमि से आने वाले जितेंद्र सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। 1991 में बीई पास करने के बाद, पिता की प्रेरणा और सिविल सेवा के प्रति रुझान ने उन्हें खाकी वर्दी तक पहुँचाया। उन्होंने बताया कि पुलिस सेवा में आना उनकी पहली योजना नहीं थी, लेकिन आज चुनौतियों से जूझना ही उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
आतंकवादी कनेक्शन और बैंक डकैती
अपने करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने इंदौर की सीरियल बैंक डकैतियों को याद किया। यह केवल एक साधारण डकैती नहीं थी, बल्कि इसके तार आतंकवादी संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ से जुड़े थे। इसे सुलझाना उनके करियर का एक गौरवशाली क्षण था। इसी तरह हाल ही में जबलपुर के खतौला में हुई बैंक डकैती और विजयनगर लूट कांड का पर्दाफाश करना भी उनकी टीम की बड़ी सफलता रही है।
साइबर ठगी: लालच, भय और अज्ञानता का खेल
साक्षात्कार का मुख्य केंद्र साइबर अपराध रहा। श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि साइबर ठग अब पढ़े-लिखे हैं और वे “लालच, भय और अज्ञानता” (Greed, Fear, and Ignorance) के तीन सूत्रों पर काम करते हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) जैसी नई वारदातों में लोग घर बैठे एक वीडियो कॉल के जरिए अपना सब कुछ गंवा रहे हैं।
एएसपी ने चेतावनी दी कि कोई भी पुलिस, सीबीआई या एटीएस अधिकारी कभी भी व्हाट्सएप या स्काइप कॉल पर आपसे पैसों की मांग नहीं करता और न ही वीडियो कॉल पर बयान दर्ज करता है। यह सब ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का खेल है, जिसके तार कंबोडिया और फिलीपींस जैसे देशों में बैठे गिरोहों से जुड़े हैं, जिसे अब ‘साइबर स्लेवरी’ भी कहा जा रहा है।
युवाओं के लिए चेतावनी गेमिंग के जरिए बच्चों को फंसाना, उनकी पहचान चोरी करना और साइबर बुलिंग (Cyber Bullying) आज के किशोरों के लिए बड़ा खतरा है। श्री सिंह ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें, क्योंकि बच्चे अक्सर फेक आईडी बनाकर सोशल मीडिया की अंधेरी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं।
मदद के लिए यहाँ संपर्क करें
बातचीत के अंत में जबलपुर पुलिस ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए। यदि आप किसी भी साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो तत्काल नेशनल हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा, जबलपुर साइबर सेल से सीधे संपर्क करने के लिए 7701050010 पर कॉल किया जा सकता है।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए तत्पर है, लेकिन आपकी जागरूकता ही आपका सबसे बड़ा हथियार है।


