जबलपुर। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत गोलबाजार को आधुनिक और सुंदर बनाने के लिए करीब 32 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस योजना में सड़क, फुटपाथ, अंडरग्राउंड नालियां, बिजली व्यवस्था और रंग-बिरंगे फूल-पौधे लगाए गए थे, लेकिन अनदेखी और लापरवाही के चलते गोलबाजार आज बदहाली के कगार पर पहुंच चुका है।
शाम के समय पूरा गोलबाजार दूधिया रोशनी से जगमगाने के लिए महंगी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं, लेकिन वर्तमान में कई लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे रात होते ही कई हिस्सों में घुप्प अंधेरा छा जाता है। फुटपाथ पर लगाई गई विदेशी हरी घास और फूलों के पौधे रखरखाव के अभाव में सूख चुके हैं। रोटरी में लगाए गए पौधों को पानी तक नहीं मिला और अब उनकी जगह गाजर घास उग आई है।
शहीद स्मारक के चारों ओर नागरिकों के टहलने के लिए बनाए गए फुटपाथों पर अब अवैध कब्जे हो चुके हैं। लोग वाहन खड़े कर रहे हैं, वहीं चाय, नाश्ता, चाट और चाइनीज के ठेले-टपरे लग गए हैं। इतना ही नहीं, फुटपाथ पर कपड़े और अन्य सामान की दुकानें भी सज गई हैं, जिनसे नगर निगम का बाजार विभाग वसूली कर रहा है। इससे फुटपाथ पर लगे पेवर ब्लॉक टूटने लगे हैं।
जगह-जगह उखड़ रही सड़कें
गोलबाजार और उससे जुड़े मार्गों के निर्माण पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों में सड़कों की ऊपरी परत उखड़ने लगी। सड़क से रेत और गिट्टी निकलने लगी, जिस पर ठेकेदार पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया था। बाद में खराब सड़क पर केवल सीमेंट का लेप लगा दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि जब यह निर्माण कार्य चल रहा था, तब स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण तक नहीं करने पहुंचे, जिसका नतीजा आज जनता बदहाल सड़कों और अव्यवस्थित बाजार के रूप में भुगत रही है।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि हालात ऐसे ही हैं, तो स्मार्ट सिटी योजना का असली फायदा जनता को कब मिलेगा?


