बालाघाट/इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान तथा वीर अकादमी बालाघाट मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में पुण्य सलिला वैनगंगा के तट पर बसा बालाघाट चर्चित नगर में जहाँ राष्ट्रीय साहित्य एवं पुरातत्व का 24 वाँ अनोखा महाभव्य अनुष्ठान दिनांक 22 फरवरी 2026 को सहयोगात्मक रुप से सादगी पूर्वक आयोजित हुआ। उक्त अवसर पर 15 राज्यों से प्रतिष्ठित पुरातत्व विद्, इतिहास विद्, साहित्य विद्, समाज शास्त्री, अधिकारियों का आगमन विश्व की जानी-मानी हस्तियों का भव्यता के साथ हुआ।
प्रथम चरण प्रातः 11 प्रारंभ हुआ। जहाँ गोपाल सोनी, अनुविभागीय दण्डाधिकारी (राजस्व) बालाघाट (म.प्र.) जिन्हें दक्षताधिपति के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि (डॉक्टरेट अवार्ड) तथा डॉ.कुमुदिनी द्विवेदी जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती (छ.ग.) जिन्हें काव्य सृजिका,लेखिका के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि (डी.लिट् अवार्ड) जो बतौर मुख्य अतिथि थे,अध्यक्षता डाॅ.फिरदोस श्राँफ, मुम्बई (महाराष्ट्र) ने की, जिन्हें अद्भुत विशिष्ट क्षेत्रों में विद्यासागर की मानद उपाधि, विशिष्ट अतिथियों में डॉ.वर्षा चौरे मुंबई (महाराष्ट्र) को चिकित्सा तथा समाज सेवा के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, पहलवान डॉ.बालासाहेब लक्ष्मण मंगसुले सांगली को रचनात्मक क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि,
श्रीमती लीलावती कुसरे नगांव (असम) को राष्ट्रीय सेवा और साहित्य के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि, रजनीकांत पटेल “रजनी” अहमदाबाद (गुजरात) को साहित्य के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि, डॉ.योगिता सावंत मुम्बई को सोशल सांयस के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि, विजय सिंह बैस गोंदिया को पुरातत्व की खोज एवं शोधापति के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि,
श्रीमती भारती सुरजीत सिंह ठाकुर अध्यक्ष नगर पालिका परिषद बालाघाट को नगर के सौंदर्यीकरण, अन्य समसामयिक रचनात्मक के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि,
प्रो.एम.एन.बापट बालाघाट को ठोस अवस्था भौतिक और पर्यावरण के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डॉ.रमेश सेवलानी बालाघाट को आयुर्वेदिक चिकित्सक तथा समाज सेवा के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डॉ.कुलवंत सिंह सलुजा को पत्रकारिता के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डॉ.भारत सातपुते लातूर को मराठी साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट, डाॅ.कविता गहरवार प्रधान सम्पादक गंगोत्री वार्षिक गद्य और पद्य राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका (गहरवार दम्पति) को प्रेस क्लब चांपा (छत्तीसगढ़) के अध्यक्ष डॉ.कुलवंत सिंह सलूजा की ओर से राष्ट्रीय कर्तव्याधिपति रत्न विद्श्री, गोपाल सोनी अनुविभागीय दण्डाधिकारी के हस्ते अलंकृत किया गया, डॉ.जगदीश चंद्र वर्मा गाजियाबाद और डॉ.कुलदीप बिल्थरे को राष्ट्रीय अद्भुत विशिष्ट रत्न विद्श्री से अलंकृत किया गया, जो मंचासिन भी थे। माँ सरस्वती का विधिवत पूजन, सरस्वती वंदना, स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। तदोपरान्त गंगोत्री वार्षिक पत्रिका का विमोचन किया गया, जिसकी प्रधान सम्पादिका डाॅ.कविता गहरवार थी, आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार “वीर” का व्यंग्य काव्य संग्रह परिदृश्य, डॉ.रामसहाय बरैया का बरैया दोहावलि तथा अन्य पत्र-पत्रिकाओं का भव्य विमोचन हुआ। पुरातत्व एवं साहित्य संगोष्ठी विषय में वर्तमान परिदृश्य में अपनी मातृभाषा एवं अन्य भाषाओं का योगदान? विषयज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी से अवगत कराया गया।
मंच संचालन डाॅ.रविन्द्र द्विवेदी ने किया, जिन्हें शिक्षा एवं साहित्य सेवा के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि दी गई।
द्वितीय चरण दोपहर 1 बजे नन्हें-मुन्नों का सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमती अनुभा मुंजारे विधायक बालाघाट थी, जिन्हें लक्ष्याधिपति के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। तदोपरान्त उन्होंने उनके द्वारा विधायक विकास निधि से टीन शेड निर्माण भव्यता के इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट परिसर के धरोहर जंक्शन में स्थापित नैरोगेज डीजल इंजन, बोगी और गार्ड डिब्बा के ऊपर करवाया गया था, जिसे विधिवत पूजन अर्चन पं.भूपेंद्र कुमार शास्त्री ने करवाकर लोकार्पित करवाया। पुन:अलंकृत की श्रंखला में डॉ.प्रवीण बढ़े पुना को आयुर्वेदिक चिकित्सक, सुप्रसिद्ध किताब आरोग्य चाणक्य के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डॉ.भुनेश्वर देवांगन लछनपुर चांपा को समाज सेवा,साहित्य के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डॉ.विजय कुमार लहरे शक्ति को चिकित्सा साहित्य के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डॉ.दत्ता बाबूलाल विधाते अहमदनगर को क्रिकेट के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, डॉ.संतोष दामोदर पेठे अकोला को शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में विद्यासागर की मानद उपाधि, श्रीमती श्रुतिमाला गायन बोरा नगांव (असम), नव कुमार महंत नगांव (असम), श्रीमती मालती विजय सिंह सिसोदिया अमरावती,
को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। इसी दौरान
व्याख्या नाविक, मन्नत गहरवार का नृत्य सराहनीय रहा।
तृतीय चरण दोपहर 2 बजे से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा प्रारंभ हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि डाॅ.रश्मिलता मिश्रा बिलासपुर जिन्हें साहित्य के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि, अध्यक्षता एडवोकेट अभिमान पाटिल दादर (पूर्व) मुंबई को राष्ट्रीय शिखर रत्न विद्श्री, विशिष्ट अतिथियों में डॉ.दिनेश चंद्र प्रसाद दीनेश कलकत्ता डॉ.सुभाष चंद्र गुप्ता बालाघाट, डॉ.संतोष कुमार सक्सेना बालाघाट, अजय कुमार पाण्डेय, संजय कुमार पाण्डेय रायपुर जिन्हें राष्ट्रीय अद्भुत विशिष्ट रत्न, डॉ.गौरव पोपट घोडे पुणे को मंदिरों में स्थित देवी-देवताओं को सुव्यवस्थित रूप से सहेजने के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि, प्रो.संजय कुमार रंगनाथ राजेघोरपडे,डॉ.वीणा अजित माच्छी ठाणे, डॉ.सूर्य प्रकाश पाण्डेय गोंडा-अयोध्या, एँड.शहानूर अहमद सैय्यद सोलापुर,डॉ.कैलाश सखाराम कोते अहमदनगर डॉ.अरूण सावंग ख़मगांव, कमलेश जांगड़े दुर्ग, साकेत वर्मा जशपुर, विजय कुमार मनहर जांजगीर-चांपा, संगीता साहा दुर्ग, निलेश जोगी जांजगीर-चांपा,
को शिक्षा,चिकित्सा,आध्यात्मिक, समाज सेवा के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि, श्रीमती प्रेमलता गुप्ता बालाघाट, महंतराव अगासे, राजेन्द्र कुमार ब्रम्हे, प्रर्मिला बिजेवार, राजेन्द्र कुमार शिवहरे, बलिनन्दर चौहान, रमेश राठी,
गजानंद सिंह नगपुरे, कमलकिशोर राऊत, विक्रम तिवारी, मुकेश यादव को राष्ट्रीय सारस्वत रत्न विद्श्री, बाबूलाल गोमासे, मिश्रीलाल साहू,सचिन सिंह गहरवार, श्याम सिंह ठाकुर, मनोहर कसार, सुशिला सतीश भारद्वाज, समीर सिंह ठाकुर, श्रीमती संजुषा यादव, दिनेश कुमार नेमा, प्रभात राहंगडाले को राष्ट्रीय शिखर रत्न विद्श्री रत्न से अलंकृत किया गया जो मंचासिन थे। मंच संचालन सुषमा नाविक ने किया, जिसे राष्ट्रीय शिखर रत्न विद्श्री से अलंकृत किया गया। जहाँ राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय एवं स्थानीय कवियों द्वारा विभिन्न छंदों पर स्वर रचनाएँ प्रस्तुत कर रसास्वादन किया।
चतुर्थ चरण सायं काल 4 बजे से हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि
श्रीयुत तिवारी बिलासपुर,अध्यक्षता विजय सिंह सिसोदिया का शाल से अलंकृत किया गया। विशिष्ट अतिथि में रविन्द्र नाथ मिश्रा सक्ती, चंद्र प्रकाश तिवारी सक्ती, श्रीमती माधुरी जायसवाल अम्बिकापुर, राजलक्ष्मी पाण्डेय अम्बिकापुर, अजय मित्तल नगांव (असम),श्रीमती संजीवनी काले अमरावती, श्रीमती सरिता अग्रवाल बिलासपुर, रंजीत सारथी अम्बिकापुर, आशीष कुमार शर्मा जांजगीर, बाबासाहेब शिन्दे अहिल्यानगर को शिक्षा,समाज, साहित्य, चिकित्सा के क्षेत्र में वाचस्पति की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। श्रीमती सुकृता सिन्हा कोनार, काशीनाथ सिद्धु कोल्हापुर, दुर्गा शंकर कसार, उदेलाल नागेश्वर को राष्ट्रीय स्वर्णिम रत्न विद्श्री, महेश दवने, सोनू विश्वकर्मा, माही चौहान, के एम.ठाकुर को राष्ट्रीय शब्द शिल्पी विद्श्री, राजेश कुमार ब्रम्हे,शांता गौतम को राष्ट्रीय साहित्य शिखर विद्श्री से अलंकृत किया गया, जो मंचासिन भी थे।
इसके अतिरिक्त शोधार्थियों महाविद्यालय छात्र/छात्राओं जितेश बोपचे, रवीन्द्र बिसेन, विनय परिहार, उमेश सैय्याम, मानसी चौरीवार, तनूजा रामावत, आराधना पेंढारकर को भी प्रशस्ति-पत्र, विराट अभिनन्दन समारोह में आदि 15 राज्यों से पधारे 251 प्रतिष्ठित विद्वानों का पोशाक (गाऊन), शाल-श्रीफल, अभिनन्दन पत्र, प्रतीक चिन्हों से स्व. अमीचंद अग्रवाल स्मृति में दिया गया। जो रात्रि 10 बजे तक चला। अंत में दिवंगत साहित्य विद् के जीवन प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आभार प्रदर्शन आचार्य डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार “वीर” ने किया
एक दिवसीय आयोजित विराट समारोह को सफल बनाने में सचिन सिंह गहरवार,आंचल गहरवार, मिश्रीलाल साहू आदि का योगदान सराहनीय रहा।


