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Jabalpur
September 19, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

कबाड़ियों का सिंडीकेट सक्रिय, बायपास रोड बनी नई कबाड़ मंडी



चोरी के वाहनों की कटाई का चल रहा बड़ा खेल

जबलपुर। शहर में कबाड़ियों के एक संगठित सिंडीकेट ने नेशनल हाईवे बायपास को नई अस्थायी कबाड़मंडी में बदल दिया है। माढ़ीताल, बेलबाग, ओमती, गोहलपुर, हनुमानताल और अधारताल थाना क्षेत्रों में सक्रिय कुछ कबाड़ी मिलकर खाली पड़े प्लॉटों पर टीन शेड डालकर चोरी और पुराने वाहनों की कटाई कर रहे हैं। करीब 7 किलोमीटर के दायरे में फैले इन कबाड़खानों में छोटे-बड़े वाहनों को लाकर कुछ ही मिनटों में उनके पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं। पुलिस की कुछ दिनों की सख्ती के बाद काम बंद हुआ था, लेकिन अब फिर से अवैध गतिविधियां शुरू हो गई हैं।

चोरी के वाहनों की बढ़ी शिकायतें

जबलपुर संभाग के जिलों में हाल ही में वाहन चोरी के मामलों में अचानक वृद्धि देखी गई है। दोपहिया वाहन पलक झपकते ही चोरी हो रहे हैं। हाल के दिनों में कार, जीप और अन्य लोहे से बनी सामग्री की चोरी भी बढ़ी है।
लोहे के दाम बढ़ने के कारण चोर लोहे से निर्मित सामान को निशाना बना रहे हैं। शहर में सक्रिय नशेड़ी गैंग साइकिल और बाइक चोरी कर सीधे कबाड़मंडी पहुंचा रहे हैं। बताया जाता है कि कबाड़ कारोबारी जानते हैं कि वाहन चोरी का है, इसके बावजूद उसे खरीद लिया जाता है।

5 से 10 मिनट में पुर्जा-पुर्जा अलग

कबाड़खानों में काम करने वाले कर्मचारी 5 से 10 मिनट के भीतर वाहन का एक-एक हिस्सा अलग कर देते हैं। कटाई के तुरंत बाद इंजन, चेसिस, टायर, बॉडी पार्ट्स आदि अलग-अलग गोदामों में रख दिए जाते हैं, जिससे पहचान मुश्किल हो जाती है।

शहर के अलावा सिहोरा, शहपुरा, पनागर, पाटन, कटंगी और मझौली क्षेत्रों में भी करीब सौ से अधिक छोटे-बड़े कबाड़ी सक्रिय बताए जा रहे हैं।

फायनेंस और टैक्स बकाया वाहन भी हो रहे कबाड़

सूत्रों के अनुसार, कई कबाड़खाने बिना दस्तावेज के वाहनों को खरीद रहे हैं। इनमें फायनेंस वाले वाहन भी शामिल हैं। कुछ मामलों में वाहन मालिक खुद ही संबंधित थाने में चोरी की एफआईआर दर्ज कराकर वाहन को बेच देते हैं।

सतना, कटनी, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, शहडोल, उमरिया, दमोह और नरसिंहपुर जैसे जिलों से भी चोरी के वाहन जबलपुर लाकर काटे जा रहे हैं।

सबसे ज्यादा कट रहे मिनी ट्रक और ऑटो

कबाड़ दुकानों में केवल चोरी के वाहन ही नहीं बल्कि टैक्स बकाया वाहन भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। बस, ट्रक, ऑटो और जीप जैसे व्यावसायिक वाहन सर्वाधिक कट रहे हैं।

कई वर्षों तक टैक्स जमा न करने पर लाखों रुपए का बकाया हो जाता है। ऐसे में वाहन मालिक औने-पौने दाम पर वाहन कबाड़ियों को बेच देते हैं। अनुमान है कि चोरी के करीब 70 फीसदी वाहन इन्हीं कबाड़ी कारखानों में टुकड़ों में काट दिए जाते हैं।

पुलिस और प्रशासन पर उठे सवाल

हालांकि पुलिस ने कुछ समय पहले सख्ती दिखाई थी, लेकिन कार्रवाई ढीली पड़ते ही अवैध कटाई फिर शुरू हो गई। बायपास रोड पर खुलेआम चल रही इस गतिविधि से कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वाहन चोरी की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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