आजाद अध्यापक शिक्षक संघ वारासिवनी ने मांग पूरी न होने पर संकेतो के माध्यम से आंदोलन की दी चेतावनी
वारासिवनी…..माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के क्रम में प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओ के शिक्षको को पात्रता परीक्षा में सम्मिलित होने संबंधी सूचना के बाद आज आजाद अध्यापक शिक्षक संघ वारासिवनी ने पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल को ज्ञापन सौंपा। जिसमे शिक्षक संघ ने अपने विरोधी स्वर से अवगत कराकर मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी के संकेत भी उजागर कर दिये है।
लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक के अनुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के अध्यापकों को पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील याचिकाओं में पारित आदेश दिनांक 01 सितम्बर 2025 के अनुसार प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापन करने वाले अध्यापकों को आगामी दो वर्षों में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित अवधि में शिक्षक, पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करते है एवं उनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय शेष हो तो ऐसे शिक्षको को स्वयं सेवानिवृत्त होने अथवा अनिवार्य सेवानिवृति प्रदान किये जाने संबंधी आदेश दिया गया है।
इसी विषय के अंतर्गत आज आजाद अध्यापक शिक्षक संघ वारासिवनी ने प्रांतीय महासचिव अरविंद पारधी के नेत्रत्व मे ब्लाक अध्यक्ष धन्नालाल बिसेन, सचिव कमलनाथ पाराशर,सचिव उत्तम मेश्राम, शीला बोरकर महिला वाहिनी अध्यक्ष के साथ ग्राम ग्राम से आये ब्लाक के लगभग 230 शिक्षको के साथ गुडडा भैया को ज्ञापन सौपा। प्रांतीय महासचिव अरविंद पारधी के अनुसार माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अन्य प्रदेश के अशासकीय याचिका में पारित निर्णय को लोकशिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा प्रदेश के सभी शिक्षकों पर भूतलक्षीय प्रभाव से लागू करते हुये शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू की गई है। भर्ती के समय लागू सेवा शर्तों के अधीन तत्समय के प्रावधान से नियुक्त किये गये शिक्षको को 25-30 वर्ष की सेवा उपरांत आज सेवा में बने रहने हेतु उन पर शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का बंधन लागू करना सेवा शर्तों का उल्लंघन है।
इस संबंध में अग्र निवेदन है कि लोक शिक्षण संचालनालय के द्वारा जारी संदर्भित पत्र को निरस्त करते हुये माननीय उच्चतम न्यायालय के पारित निर्णय के विरुद्ध उ प्र सहित अन्य प्रदेश शासन द्वारा दाखिल रिव्यू पिटीशन की भाँति म प्र शासन की ओर से भी रिव्यू पिटीशन दाखिल की जाये। अन्यथा की स्थिति में आग्रह है कि लोक शिक्षण संचालनालय के द्वारा जारी संदर्भित पत्र को तब तक स्थगित किया जाये जब तक माननीय उच्चतम न्यायालय की सिविल अपील में पारित निर्णय के विरुद्ध उ प्र सहित अन्य प्रदेश शासन द्वारा दाखिल रिव्यू पिटीशन पर माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णय पारित नहीं किया जाये। दूसरी ओर शिक्षकगणो के द्वारा संकेतो के अनुसार अगर उनकी मांगो को पूर्ण नही किया जाता है तो वे आंदोलन के माध्यम से भी अपनी मांग को पूरा करने का प्रयास अवश्य करेगे।
दूसरी ओर पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल ने आजाद अध्यापक शिक्षक संघ वारासिवनी के ज्ञापन के बाद शिक्षकगणो को आश्वस्त कराया है कि उनकी भावनाओ का अवश्य सम्मान होंगा। आपकी भावना से अवगत कराने के लिये प्रदेश शासन को आज ही पत्र लिखा जा रहा है। और जल्द मुख्यमंत्री डा मोहन यादव से मुलाकात होने पर आपकी भावनाओ से प्राथमिकता के साथ अवगत कराया जायेगा।


