जबलपुर। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष पद को लेकर इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा के बाद अब सबकी नजर इस पद पर टिक गई है, जिसके लिए कई दावेदार सक्रिय हो गए हैं और भोपाल में रहकर अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
यह मुकाबला अब केवल संगठनात्मक चयन नहीं रह गया है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही गुटीय राजनीति का भी आईना बन गया है। अलग-अलग गुट अपने पसंदीदा चेहरों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं, जिससे माहौल और ज्यादा गरमाया हुआ है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन अंदरखाने खींचतान साफ महसूस की जा सकती है।
दावेदारों में ईशान नायक, रविंद्र तिवारी और रौनक अग्रवाल के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन तीनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा मानी जा रही है। वहीं कुछ अन्य नेता प्रदेश स्तर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। कई लोगों के लिए यह पद प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है, जबकि कुछ युवा चेहरे अपने जमीनी काम और सक्रियता के दम पर दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सांसदों, विधायकों और संगठन के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। बिना उनकी सहमति किसी नाम पर अंतिम निर्णय होना मुश्किल है। यही कारण है कि सभी दावेदार लगातार बड़े नेताओं से संपर्क साधकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
इसी बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की संभावित एंट्री की चर्चाओं ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। माना जा रहा है कि यदि परिषद से कोई नाम अचानक सामने आता है, तो अब तक बने समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता भी भाजपा के लिए चुनौती बनी हुई है। जबलपुर से कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के कारण यहां की राजनीति और अधिक संवेदनशील हो गई है। ऐसे में भाजपा के सामने यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वह ऐसा प्रभावी चेहरा चुने जो युवाओं के बीच मजबूत पकड़ बना सके और संगठन को मजबूती दे सके।
कुल मिलाकर, युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष का यह चयन अब संगठन की आंतरिक ताकत, संतुलन और भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला अहम फैसला बन गया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि अंततः किस नाम पर सहमति बनती है और किसे यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाती है।


