*प्रचार-प्रचार और जीर्णोद्वार को लेकर रखे अपने विचार*
*यादें” त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन*
*पुरातत्व प्रेमियों का हुआ सम्मान*
*यादगार धरोहर प्रर्दशनी लोकार्पित*
*18,19 अप्रैल दो दिवसीय समारोह सम्पन्न*
बालाघाट/इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय में विश्व पुरातत्व धरोहर दिवस पर 18,19 अप्रैल को समारोह आयोजित हुआ। 18 अप्रैल को प्रथम चरण में यादगार धरोहर प्रदर्शनी को जनता हेतु लोकार्पित किया, जिसे देखकर पुरातत्व प्रेमियों को ज्ञानवर्धक जानकारियां देखकर आकर्षित हो गए। तदोपरान्त पुरातत्व संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पुरातत्व विद् एवं से.नि.तहसीलदार रायपुर डॉ.रामविजय शर्मा, कार्यक्रम की अध्यक्षता संग्रहाध्यक्ष डॉ वीरेन्द्र सिंह गहरवार ने की और विशिष्ट अतिथि के तौर पर राधेश्याम शर्मा,सेवानिवृत,प्रधान पाठक एवम पूर्व जिला नोडल अधिकारी ( ए.पी.सी ) समग्र शिक्षा जांजगीर एवं सक्ति (छत्तीसगढ़), श्रीमती शांता तिवारी, यूनुस खान,राजेन्द्र कुमार ब्रम्हें, दिनेश कुमार नेमा, राजकुमार शर्मा,समीर सिंह गहरवार, श्याम सिंह ठाकुर, सतीश भारद्वाज थे। इस पावन पर डॉ.रामविजय शर्मा, इतिहासकार एवं पुरातत्ववेता, रायपुर भारत द्वारा आदिवासी महाकवि कालीदास पंडों एवं उनके मृगाडांड़ के मूल निवासी एवं मृगाडांड़ के मूल पंडो आदिवासी होने के 365 प्रमाणों पर व्याख्यान दिया। तदोपरान्त डॉ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष गहरवार ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अवगत कराते हुए कार्यक्रम का उद्देश्य प्रस्तावना रखी। उन्होंने पुरातत्व को लेकर अब तक उनके द्वारा किए गए कार्यो की जानकारी भी सांझा की, उन्होंने लांजी के कोटेश्वर महादेव मंदिर और किले को विश्व पुरातत्व धरोहर में शामिल करने की पहल की जायेगी। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जटाशंकर त्रिवेदी महाविद्यालय एवं कमला नेहरु महिला महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं शामिल रहे, जिन्हें जिले की विभिन्न धरोहरों से अवगत कराते हुए डॉ. गहरवार ने उनसे प्रश्न भी पूछे। जिले के राज्य और केन्द्र शासन से संरक्षित पुरातत्व और पर्यटन स्थलों को लेकर विचार विमर्श भी किया गया। सभी बच्चों को संरक्षण का भ्रमण कराया गया।
द्वितीय चरण में डॉ.रामविजय शर्मा रायपुर तथा डॉ.समीर सिंह गहरवार बालाघाट को राष्ट्रीय दुर्लभ पुरातत्वों की खोज में विद्यासागर उपाधि (डी.लिट् अवार्ड), राधेश्याम शर्मा खरसिया,नरेंद्र पाण्डेय झारखंड, श्रीमती प्रिया मेनन पुणे को शिक्षा,समाज, साहित्य एवं रचनात्मक क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में वाचस्पति की मानद उपाधि (डॉक्टरेट अवार्ड), श्रीमती शांता तिवारी बालाघाट, यूनुस खान “पापा भाई” बालाघाट को राष्ट्रीय अद्भुत विशिष्ट रत्न विद्श्री, राजकुमार शर्मा वारासिवनी को राष्ट्रीय शिखर रत्न विद्श्री से अलंकृत किया गया।
उक्त अवसर पर “यादें” हिन्दी त्रैमासिक सामान्य अंक, जिसमें इतिहास, पुरातत्व, साहित्य, सांस्कृतिक, पर्यावरण पर विषय विशेषज्ञ के शोध आलेख प्रकाशित हुए, जिसमें डॉ.जे.बी.नागरत्नम्म् शिमोगा (कर्नाटक), डी.के.लिंगराज शिकारीपुर (कर्नाटक),डाॅ.रामविजय शर्मा रायपुर, डाॅ.रामसहाय बरैया ग्वालियर (मध्यप्रदेश), डाॅ.वर्षा सुनिता रामचंद्र चौरे मुंबई (महाराष्ट्र),डाॅ.नंदिता बाली सोलन (हिमाचल प्रदेश), डाॅ.कविता गहरवार, शांता गौतम, रिया शर्मा सहित पुरातत्व संग्रहालय एवं महाविद्यालय विद्यार्जन करने वाले विधार्थियों एवं पुरातत्व प्रेमियों का अभिनन्दन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
तृतीय चरण में विश्व पुरातत्व धरोहर पर तथात्मक रचनाओं का स्वर पठन-पाठन कर श्रोताओं को रसास्वादन करवाया।
इसी अवसर पर रंगीन कोटेबल टी.बी.राजकुमार शर्मा ने पुरातत्व संग्रहालय को सप्रेम भेंट किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों ने भी पुरातत्व धरोहरों का महत्व बताते हुए इनका संरक्षण और जीर्णोद्वार क्यों आवश्यक है इसके बारे में अवगत। सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित पर्यटन और पुरातत्व स्थलों की जानकारी एकत्रित करने कहा गया।यह महाभव्य अनुष्ठान दोपहर 1 बजे से शाम 7 बजे तक चलता रहा।
दिनांक 19 अप्रैल को प्रातःकाल 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक जिले की ऐतिहासिक बावली हट्टा का अवलोकन कर पर्यटक और पुरातत्व शोधार्थियों को बावली की रोचक घटनाओं से परिचित करवाते हुए, बावली बनाने का उद्देश्य, कुंए में संग्रहित जल के संवर्द्धन, पुरातत्व अवशेषों से सरंक्षण पर प्रकाश डाला गया। उक्त अवसर डॉ.रामविजय शर्मा इतिहासकार, डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष, राजेन्द्र कुमार ब्रम्हें, दिनेश कुमार नेमा, प्रताप सिंह नगपुरे आदि उपस्थित होकर महत्ता से चिरपरिचित कराया।
अंत में दोपहर बालाघाट इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट परिसर में पहुंच कर दो दिवसीय समारोह का समापन किया गया।
*यह रहे उपस्थित*
कार्यक्रम में अतिथियों के अलावा शोधार्थी और विद्यार्थियों में सुषमा नाविक, राजेश कुमार ब्रम्हें, रविन्द्र बिसेन, विनय परिहार, उमेश सैय्याम, अकलेश ब्रम्हे, पराग अम्बिलकार, आराधना फेन्डारकर, शुभांगी चचाने, कीर्ति बोरकर, प्रीति बोरकर, अंजली लाकड़े सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं शामिल रहे।


