कोतमा। अनूपपुर जिले से सूचना के अधिकार कानून के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत पायारी नंबर 1 जनपद अनूपपुर के लोक सूचना अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने एक आवेदक से जानकारी उपलब्ध कराने के बदले नियमों के विरुद्ध भारी-भरकम राशि की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार एक जागरूक नागरिक ने आरटीआई के तहत ग्राम पंचायत से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग की थी। आवेदन के जवाब में लोक सूचना अधिकारी ने पत्र जारी कर बताया कि मांगी गई जानकारी कुल 810 पृष्ठों की है। हालांकि विवाद तब खड़ा हुआ जब अधिकारी ने इन दस्तावेजों की तीन प्रतियां तैयार करने का हवाला देते हुए आवेदक से 7290 रुपये जमा करने को कहा। इस मांग को लेकर आवेदक सहित स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखने को मिल रही है।
नियम क्या कहते हैं?
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत फोटोकॉपी के लिए सामान्य शुल्क 2 रुपये प्रति पृष्ठ निर्धारित है। इस हिसाब से 810 पृष्ठों के लिए अधिकतम राशि 1620 रुपये बनती है। इसके बावजूद 7290 रुपये की मांग करना स्पष्ट रूप से नियमों के विपरीत माना जा रहा है।
तीन प्रतियों का नियम कहाँ?
विशेषज्ञों और जानकारों का कहना है कि आरटीआई कानून में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि आवेदक को जबरन तीन प्रतियों में जानकारी दी जाए या उसका शुल्क लिया जाए। आवेदक को केवल एक प्रति उपलब्ध कराना ही पर्याप्त होता है। ऐसे में तीन प्रतियों के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूलना पूरी तरह अनुचित है।
भ्रामक गणना से उठे सवाल
810 पृष्ठों के लिए 7290 रुपये की मांग न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि यह आवेदक को जानकारी प्राप्त करने से हतोत्साहित करने की कोशिश भी प्रतीत होती है।
इस तरह की भ्रामक गणना से विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिम्मेदारी से बचने का प्रयास?
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि लोक सूचना अधिकारी अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। तकनीकी कारणों और अनावश्यक शुल्क का सहारा लेकर जानकारी देने से बचने की कोशिश की जा रही है, जिससे आरटीआई कानून की मंशा को नुकसान पहुंच रहा है।


