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April 17, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

बच्चों के पाचन स्वास्थ्य की न करें अनदेखी, इन आम संकेतों पर दें ध्यान



नई दिल्ली, 16 अप्रैल । बच्चों की सेहत का ध्यान रखना आज के व्यस्त जीवन में और भी जरूरी हो गया है। बचपन में छोटी-छोटी लापरवाही भी उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकती है। सही खान-पान, नियमित खेलकूद और समय पर टीकाकरण के साथ-साथ बच्चों के पाचन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना बेहद आवश्यक है।



नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं, लेकिन माता-पिता अक्सर इनके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर समय पर इन संकेतों को पहचाना जाए तो गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है।

बच्चों में आम पाचन समस्याएं और उनके संकेत की बात करें तो इसमें कब्ज से लेकर कमजोरी तक शामिल है, जिन्हें आम तौर पर इग्नोर कर दिया जाता है। हालांकि, समय के साथ आगे चलकर यही बड़ी समस्या की वजह भी न जाता है। बच्चों का पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए छोटी-छोटी समस्याएं भी जल्दी बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि माता-पिता को बच्चों के हर छोटे बदलाव पर नजर रखनी चाहिए। सही समय पर पहचान और उपचार से बच्चे स्वस्थ और खुशहाल रह सकते हैं।

इन संकेतों में पहला है कब्ज, बच्चा कठोर मल त्याग करता है या शौच के समय रोता-चिल्लाता है। कई बार बच्चा शौच करने से डरने लगता है। दूसरा है दस्त, बच्चे को बार-बार पतला मल आना। इससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है। बच्चा सुस्त पड़ जाता है और कमजोर दिखने लगता है।

बच्चे के पेट में जलन और एसिडिटी भी एक बड़ा संकेत है। बच्चा बार-बार पेट में जलन की शिकायत करता है, उसे उल्टी आती है या खट्टी डकारें आने लगती हैं। भोजन असहजता या फूड इनटॉलेरेंस भी शामिल है, जैसे दूध, गेहूं या किसी विशेष खाने से पेट फूलना, दर्द होना या चकत्ते पड़ना। कृमि संक्रमण अस्वच्छता के कारण होने वाली यह समस्या बच्चों में बहुत आम है। बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत करता है, भूख कम लगती है, वजन नहीं बढ़ता और कभी-कभी नींद में दांत पीसता है।

शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के पाचन स्वास्थ्य को लेकर माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए। अगर बच्चा बार-बार पेट दर्द, उल्टी, दस्त या कब्ज की शिकायत करे तो इसे सामान्य न समझें। ऐसे में बच्चे के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। घरेलू नुस्खों से जल्द आराम न मिले तो ज्यादा देर करने की बजाय तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। बच्चे को साफ-सुथरा रखें, उबला पानी पिलाएं और संतुलित आहार दें। साथ ही नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें।

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