जबलपुर। जिले में सरकारी स्कूलों के गिरते परीक्षा परिणामों को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला जब कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने शिक्षा व्यवस्था की अलग से गहन समीक्षा करते हुए सीधे जिम्मेदारों पर कार्रवाई की। 5वीं और 8वीं कक्षा के हालिया परीक्षा परिणामों के आधार पर दोषी शिक्षकों और अधिकारियों को चिन्हित कर दंडित किया गया।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी, जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारी, विभिन्न विकासखंडों के बीईओ और बीआरसी मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा में सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों का परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक रहा। एक विद्यालय का परिणाम मात्र 39 प्रतिशत तक सीमित रहा, जबकि कुंडम क्षेत्र के कुछ स्कूलों में 70 से 80 प्रतिशत तक परिणाम दर्ज किया गया। इस असमानता पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताते हुए शिक्षकों की कार्यशैली और पढ़ाने में रुचि की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
कार्रवाई के तहत चेरीताल संकुल के जनशिक्षक प्रदीप पटेल और अलका कोरी के निलंबन के निर्देश दिए गए। वहीं स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा के दौरान जब बंद और चालू शौचालयों की जानकारी मांगी गई तो संबंधित उपयंत्री सुभाष शर्मा संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इस पर कलेक्टर ने उन्हें फटकार लगाते हुए उनके निलंबन का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
समीक्षा में यह भी तय किया गया कि खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार बीआरसी को भी हटाया जाएगा। कलेक्टर ने साफ कहा कि जिम्मेदारी से काम नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इसके अलावा बीआरसी नगर-1 के डीसी अहिरवार और नगर-2 के आशीष श्रीवास्तव पर भी कार्रवाई करते हुए उनका एक माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। इन पर छात्र मैपिंग और परीक्षा संबंधी कार्यों में लापरवाही बरतने का आरोप है। साथ ही उन्हें तीन दिनों के भीतर लंबित कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कलेक्टर ने यह भी बताया कि जल्द ही 10वीं और 12वीं कक्षाओं के परीक्षा परिणामों की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों को शालावार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
बैठक में स्कूलों में पेयजल, बिजली, प्रकाश व्यवस्था, पुस्तकों और साइकिल वितरण जैसी मूलभूत सुविधाओं को समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही जिन स्कूलों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, उनके लिए विशेष रणनीति बनाकर सुधार की दिशा में काम करने की बात कही गई। इसके तहत अतिरिक्त कक्षाएं, नियमित मॉनिटरिंग और शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाएगी।
कुल मिलाकर प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि शिक्षा की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


