किसानों ने लगाए भेदभाव और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
जबलपुर। जिले में गेहूं खरीदी प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी व्यवस्था में पारदर्शिता नजर नहीं आ रही है। किसानों का आरोप है कि कई खरीदी केंद्रों पर समिति प्रबंधक और वेयरहाउस संचालक मनमानी कर रहे हैं और “चेहरा देखकर” गेहूं की तौल की जा रही है। इससे सामान्य किसानों को अपनी उपज बेचने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
किसानों के अनुसार खरीदी केंद्रों पर अधिकारियों और प्रबंधकों के परिचितों तथा रिश्तेदारों का गेहूं पहले तौला जा रहा है, जबकि अन्य किसान घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद इंतजार करते रह जाते हैं। इस भेदभावपूर्ण रवैये से किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
कई स्थानों पर किसानों का गेहूं यह कहकर नहीं लिया जा रहा कि उसकी गुणवत्ता खराब है। किसानों का कहना है कि यह केवल बहाना बनाया जा रहा है, ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके और निरीक्षण के दौरान कार्रवाई से बचाव हो सके।
सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया है कि कुछ खरीदी केंद्रों पर गेहूं तौलने के बदले किसानों से आधा क्विंटल तक अतिरिक्त गेहूं “कमीशन” के रूप में मांगा जा रहा है। किसानों ने इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत भी की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जिले के कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने खरीदी केंद्रों के नियमित निरीक्षण के सख्त निर्देश दिए हैं, इसके बावजूद कई अधिकारी निरीक्षण से बचते नजर आ रहे हैं। निरीक्षण के अभाव में खरीदी केंद्रों पर मनमानी और धांधली लगातार बढ़ रही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, अन्यथा वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


