बाबा साहब अंबेडकर जी की जन्मजयंती पर आयोजित की गई विचार संगोष्ठी
जबलपुर।बाबा साहब के नाम से ही सभी को संविधान याद आता है, संविधान हमारे लिए राष्ट्रीय ग्रंथ है, देश के प्रधानमंत्री ने पद प्राप्त करते ही सर्वप्रथम संविधान को प्रणाम किया, बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर ने संघर्ष, ज्ञान और संकल्प को अपने मन में रखकर काम किया और सभी को समान अधिकार दिलाए बाबा साहब ने उस समय संघर्ष किया, जब लोग छुआछूत की भावना से ग्रसित थे बाबा साहब ने छात्र जीवन ही अन्याय के खिलाफ लड़ने का मन बनाया और कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया यह बात सांसद आशीष दुबे ने बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर की जन्मजयंती के उपलक्ष्य में भाजपा संभागीय कार्यालय रानीताल में आयोजित विचार संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।
डॉ भीमराव अंबेडकर जी की जयंती के उपलक्ष्य में भाजपा संभागीय कार्यालय रानीताल में आयोजित विचार संगोष्ठी सांसद श्री आशीष दुबे, जिला अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, आलोक संजर, हरेंद्रजीत सिंह बब्बू, सदानंद गोडबोले, स्वाति गोडबोले, राजकुमार मेहता, राममूर्ति मिश्रा, श्रीकान्त साहू, संदीप रजक, कृष्णा चौधरी, सुषमा जैन, अर्चना अग्रवाल, दीपांकर बनर्जी, शिवा चौधरी, शिवराम बेन की उपस्थिति में सम्पन्न हुई।
श्री आशीष दुबे ने कहा कि बाबा साहब ने अपने लक्ष्य एवं ज्ञान को अर्जित कर कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया, समाज के पीड़ित व्यक्तियों के लिए जीवन के अंतिम समय तक संघर्ष किया एवं व्यक्तियों को सामाजिक समानता दिलाने का काम किया, बाबा साहब को उनके कार्य के बल पर मंत्री बनाया गया बाबा साहब ने विभिन्न समाज के लोगों में एकता लाने के साथ पिछड़े वर्गों को सामाजिक समरसता के साथ आगे लाने का काम किया। उनका समाज के प्रति किया गया काम एवं देश संविधान निर्माण में उनकी मुख्य भूमिका के कारण सामाजिक दोषों से मुक्ति प्राप्त हुई ।
जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने कहा कि महामानव बाबा साहब की जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विचार संगोष्ठी का आयोजन हुआ है बाबा साहब ने शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो, का यह मंत्र सभी को दिया ताकि प्रत्येक व्यक्ति आगे बढ़ सकें भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके, समाज में अंतिम पंक्ति तक के व्यक्ति के उत्थान की कल्पना करते हुए सामाजिक समरसता का भाव प्रकट कर बाबा साहब ने आधुनिक भारत की संकल्पना साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जिला प्रभारी श्री आलोक संजर ने कहा कि वस्तुतः हम यदि बाबा साहब के जीवन को देखेंगे तो दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानव दर्शन को पाएंगे। दोनों ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक की चिंता की, बाबा साहब ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए कहा कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा। भाजपा ने उनके जन्मस्थली से लेकर उनसे जुड़े प्रत्येक स्मारक को संवारने का काम किया उन्हें भारत रत्न देकर हमारी सरकार ने उनको सर्वोच्च सम्मान दिया। बाबा साहब ने संविधान निर्माण के साथ ही सामाजिक व्यक्ति को न्याय दिलाने का कार्य किया है उनके विचारों को यदि सभी आत्मसात करें तो निश्चित ही सामाजिक जीवन में सफलता प्राप्त होगी।
विचार संगोष्ठी में रंजीत पटेल, अभय सिंह ठाकुर, शंकर श्रीवास्तव, राजेश मिश्रा, रजनीश यादव, प्रणीत वर्मा, मनीष जैन कल्लू, अशोक रोहितास, रीना राय, योगेश बिलोहा, कुसुम चौबे, मीना मरकाम, राहुल रजक, दिलीप पटेल, सोनू बचवानी, राहुल श्रीवास्तव, ईशान नायक, महेश राजपूत, अतुल जैन, श्रीराम पटेल, रोहित जैन, मधुबाला राजपूत, लवलीन आनंद, मोनिका सिंह, अर्चना सिसोदिया, सारिका राय, आत्मीका सिंह, सुमन यादव, दीपमाला केसरवानी, राजकुमार गुप्ता, अजय तिवारी, राजा सराफ, मुरली दुबे, अजय अधिकार, संतोष जायसवाल, जागेश समुंद्रे, आदि उपस्थित थे।


