April 28, 2026
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वित्त वर्ष 2027 में पुरानी बनाम नई आयकर व्यवस्था में कर्मचारियों के लिए कौन सा विकल्प रहेगा फायदेमंद?

नई दिल्ली, 26 अप्रैल । वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होते ही सैलरीड कर्मचारियों के सामने एक बार फिर पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से सही विकल्प चुनने की चुनौती आ गई है। यह फैसला आपकी आय, निवेश और टैक्स बचाने की आदतों पर निर्भर करता है। सही विकल्प चुनने से आपके टैक्स का बोझ और हर महीने मिलने वाली सैलरी पर सीधा असर पड़ता है। हालांकि इस साल आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कुछ नए अपडेट और स्पष्टीकरण के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि कौन-सा टैक्स सिस्टम ज्यादा बेहतर है। कई लोगों के लिए इस साल सही विकल्प पिछले साल से अलग भी हो सकता है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था (ओल्ड टैक्स रिजीम) में टैक्सपेयर्स को कई तरह की छूट और डिडक्शन मिलती हैं, जैसे सेक्शन 80सी में निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस (80डी), होम लोन ब्याज, एचआरए और एलटीए। लेकिन इसके बदले टैक्स दरें ज्यादा होती हैं। इसमें 2.5 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं, 2.5-5 लाख पर 5 प्रतिशत, 5-10 लाख पर 20 प्रतिशत और 10 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है। वहीं नई टैक्स व्यवस्था (न्यू टैक्स रिजीम) में टैक्स दरें कम हैं, लेकिन ज्यादातर छूट और डिडक्शन हटा दिए गए हैं। इसमें 4 लाख तक आय टैक्स फ्री है, 4-8 लाख पर 5 प्रतिशत, 8-12 लाख पर 10 प्रतिशत, 12-16 लाख पर 15 प्रतिशत, 16-20 लाख पर 20 प्रतिशत, 20-24 लाख पर 25 प्रतिशत और 24 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स देना होता है।

अगर आपकी सालाना आय 12.75 लाख रुपए तक है, तो नई टैक्स व्यवस्था आपके लिए फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 87ए के तहत टैक्स शून्य हो सकता है। साथ ही, जो लोग टैक्स सेविंग निवेश नहीं करते या ज्यादा टेक-होम सैलरी चाहते हैं, उनके लिए भी नया सिस्टम बेहतर है। वहीं, अगर आप 4-5 लाख रुपए या उससे ज्यादा डिडक्शन क्लेम करते हैं, जैसे 80सी, 80डी, एचआरए या होम लोन, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था ज्यादा लाभदायक हो सकती है। खासतौर पर मिडिल क्लास और फैमिली जिम्मेदारियों वाले लोगों के लिए यह विकल्प बेहतर साबित हो सकती है। हाल ही में आयकर कानून में किए गए कुछ बदलाव वित्त वर्ष 2027 की फाइलिंग पर तुरंत असर नहीं डालेंगे।

ये बदलाव जून-जुलाई 2027 में रिटर्न भरते समय लागू होंगे। वहीं, बजट 2026 के तहत आईटीआर-3 और आईटीआर-4 भरने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। 1 अप्रैल 2026 से कुछ नए बदलाव लागू हुए हैं। अब पुरानी टैक्स व्यवस्था में 200 रुपए तक के भोजन पर मिलने वाला अलाउंस टैक्स फ्री होगा, जो पहले 50 रुपए था। गिफ्ट वाउचर और कूपन 15,000 रुपए सालाना तक टैक्स फ्री होंगे। इसके अलावा अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे को हाई एचआरए कैटेगरी में शामिल किया गया है। बच्चों की शिक्षा भत्ता 100 रुपए से बढ़ाकर 3,000 रुपए प्रति माह और हॉस्टल खर्च 300 रुपए से बढ़ाकर 9,000 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। कंपनी द्वारा दिए गए वाहन पर टैक्स इंजन की क्षमता के हिसाब से तय किया जाएगा।

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