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उगली-मोहबर्रा क्षेत्र में सीमित आपूर्ति से जनजीवन प्रभावित, प्रशासन से समाधान की मांग
सिवनी/उगली। केवलारी विधानसभा अंतर्गत उगली उप तहसील और मोहबर्रा क्षेत्र में इन दिनों पेट्रोल-डीजल की किल्लत से ग्रामीण क्षेत्रवासी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जहां दोपहिया और चारपहिया वाहन मालिक घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद उत्पन्न वैश्विक ईंधन संकट का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी साफ दिखाई दे रहा है। एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की अनियमित आपूर्ति के चलते लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से उगली उप तहसील अंतर्गत आने वाले 32 ग्राम पंचायतों और लगभग 70 छोटे-बड़े गांवों के हजारों ग्रामीणों को ईंधन संकट से जूझना पड़ रहा है।
मोहबर्रा ग्राम में पिछले एक दशक से दो पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि एक पंप पर पेट्रोल पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जबकि दूसरे पंप पर केवल सीमित मात्रा में ही पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार दोपहिया वाहनों को मात्र 100 रुपये तक का पेट्रोल और बड़े वाहनों को 500 रुपये तक का डीजल-पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
पूरे क्षेत्र में केवल तीन पेट्रोल पंप—मोहबर्रा के दो पंप और पां. छपारा क्षेत्र के रेचना ग्राम स्थित गीता फ्यूल्स—पर ही ईंधन की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं की निर्भरता इन्हीं सीमित संसाधनों पर है।
पेट्रोल पंप संचालक ने बताई समस्या
मोहबर्रा स्थित पेट्रोल पंप संचालक गौरव बिसेन ने बताया कि बड़े ट्रकों और जेसीबी जैसे भारी वाहनों को फिलहाल पूर्ण मात्रा में डीजल नहीं दिया जा रहा है, जबकि छोटे वाहनों को सीमित मात्रा में पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि—
“ग्रामीण क्षेत्र के पेट्रोल पंपों में लगातार आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। जिला प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।”
वहीं अन्य पंप संचालकों ने भी बताया कि दो-दो से तीन-तीन दिन के अंतराल में ईंधन की आपूर्ति हो रही है। एडवांस में डीडी जमा करने के बावजूद नियमित सप्लाई नहीं मिल रही, जिससे हर एक-दो दिन में पंप ड्राई कंडीशन में पहुंच जाते हैं।
ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
दैनिक उपयोगकर्ता छोटे वाहन मालिकों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन 1 से 2 लीटर पेट्रोल की आवश्यकता होती है। इतने छोटे कार्य के लिए सिवनी या बालाघाट जाना संभव नहीं है। वर्तमान में शादी-विवाह के सीजन और खेती-किसानी के कार्यों के चलते वाहनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि ग्रामीण अंचलों में स्थित पेट्रोल पंपों की ईंधन आपूर्ति नियमित कराई जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
प्रशासन से अपेक्षा
ग्रामीणों का कहना है कि गांव और कस्बों में भी बड़ी आबादी निवास करती है और आधुनिक जीवनशैली में वाहनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की इस प्रकार की कमी से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगों ने संवेदनशील कलेक्टर और जिला प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है।


