*बालाघाट। जिला कांग्रेस कमेटी के नए गठन ने संगठन के भीतर भारी असंतोष को जन्म दे* *दिया है। लालबर्रा ब्लॉक से पिछले कार्यकाल में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नारायण परिहार, मधु शर्मा*, *विशाल बिसेन, राकेश* *डहरवाल, रवि अग्रवाल, मनोहर अग्रवाल, ज्ञान शर्मा, दीपक अग्रवाल, अनीस खान, आनंद बिसेन और बालकृष्ण बिसेन जैसे अनुभवी और* *जमीनी नेताओं को इस बार पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।*
*हैरानी की बात यह है कि बालाघाट क्षेत्र के भी कई कद्दावर और लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे चेहरों—रहीम खान, अल्ला रक्खा, जुगल शर्मा, राजा सोनी, सुधीर तिवारी, अशोक शर्मा, कल्लू सोनी, छबि राम नागेश्वर, शमीम सिद्दीकी, नितिन भोज, दिनेश धुर्वे, राकेश सिंगारे, राजेश ठाकुर और शेषराम रहांगडाले—को भी दरकिनार कर दिया* *गया। ये वे नाम हैं जो वर्षों से संगठन की रीढ़ माने जाते रहे हैं।*
*अब सवाल सीधा और तीखा है—आखिर इन जमीनी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को किन कारणों से नजरअंदाज किया गया?* *क्या यह फैसला संगठन को मजबूत करने के लिए लिया गया है या फिर इसके पीछे अंदरूनी खींचतान,* *पक्षपात और चापलूसी का खेल चल रहा है?*
*सबसे बड़ा प्रश्न यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या यह चूक नेतृत्व स्तर की है या फिर ब्लॉक अध्यक्षों की नाकामी, जो अपने ही क्षेत्र के समर्पित कार्यकर्ताओं के हक में आवाज तक नहीं उठा सके? अगर जमीनी* *कार्यकर्ताओं की इस तरह अनदेखी होती रही, तो इसका सीधा असर संगठन की मजबूती और आगामी चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है।*
*फिलहाल, कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी साफ दिखाई दे रही है और आने वाले दिनों में यह असंतोष खुलकर सामने आ सकता है।**
—
—


