बरगी डैम की शांत लहरों ने इस बार एक ऐसा दर्द देखा, जिसे शब्दों में समेटना आसान नहीं है। हादसे की खबरें अक्सर आंकड़ों में दर्ज हो जाती हैं कितने लोग बचाए गए, कितनों की मौत हुई, कितने अब भी लापता हैं। लेकिन कुछ दृश्य आंकड़ों से बहुत आगे निकल जाते हैं। वे सीधे आत्मा पर दस्तक देते हैं। मरीना मैसी और उनके चार साल के बेटे त्रिशान की वह अंतिम तस्वीर भी ऐसी ही है एक मां, जिसने अपनी आखिरी सांस तक अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा।
मां का प्रेम दुनिया की सबसे गहरी भाषा है। वह भाषा, जिसे समझने के लिए शब्द नहीं, सिर्फ संवेदना चाहिए। बरगी के इस दर्दनाक हादसे में मरीना ने वही भाषा लिखी अपने कांपते हाथों से, अपने टूटते साहस से, अपनी आखिरी उम्मीद से। जब जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी कुछ सांसों में सिमट गई होगी, तब भी उन्होंने खुद को नहीं, अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की। अपनी ही लाइफ जैकेट के भीतर अपने कलेजे के टुकड़े को समेट लेना, यह केवल एक मां ही कर सकती है।
कहते हैं, मौत सब कुछ छीन लेती है। लेकिन इस मां की ममता के आगे मौत भी असहाय दिखी। काल का क्रूर झोंका शरीरों को भले ले गया, लेकिन उस आलिंगन को नहीं तोड़ सका। मां की बांहों में जकड़ा वह मासूम बेटा और बेटे को सीने से लगाए वह मां यह दृश्य सिर्फ एक हादसे की तस्वीर नहीं, बल्कि ममता की अमर गाथा है।
रेस्क्यू टीम के सदस्य, जो अक्सर कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं, वे भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। क्योंकि वहां सिर्फ दो शव नहीं थे, वहां एक मां का आखिरी संघर्ष था। वहां एक ऐसी कोशिश थी, जिसमें सांसें हार गईं, लेकिन ममता जीत गई।
सी टाइम्स की पूरी टीम मरीना मैसी और मासूम त्रिशान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है। इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार प्रदीप मैसी, बेटी सिया और सभी परिजनों के साथ खड़े हैं। यह क्षति अपूरणीय है। कोई शब्द इस खालीपन को भर नहीं सकते, कोई संवेदना इस पीड़ा को कम नहीं कर सकती। फिर भी समाज की ओर से, शहर की ओर से, और इंसानियत की ओर से हम इस मां को नमन करते हैं।
मरीना मैसी की यह ममता आने वाले समय में हर दिल में एक सवाल भी छोड़ेगी क्या हमारी व्यवस्थाएं इतनी सुरक्षित हैं कि किसी मां को अपने बच्चे को बचाने के लिए मृत्यु से अकेले लड़ना पड़े? यह हादसा सिर्फ दुख नहीं, एक चेतावनी भी है। पर्यटन, सुरक्षा और जिम्मेदारी के नाम पर जो भी कमी रही हो, उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। क्योंकि हर जीवन अनमोल है, और हर परिवार का दर्द आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता।
आज बरगी की लहरें भारी हैं। जबलपुर का मन भारी है। लेकिन इस अंधेरे के बीच एक मां की ममता दीपक की तरह जल रही है जो हमें याद दिलाती है कि मां केवल जन्म नहीं देती, वह आखिरी सांस तक रक्षा करती है।
मरीना मैसी को सी टाइम्स का शत-शत नमन
मासूम त्रिशान को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि
ईश्वर परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति दे


