सुपखार क्षेत्र में चार और जंगली भैंसों को विशेष बाड़े में किया गया मुक्
मध्यप्रदेश में विलुप्त हो चुकी जंगली भैंसा प्रजाति के पुनर्स्थापना अभियान के अंतर्गत कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम का द्वितीय चरण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार परिक्षेत्र में आज 09 मई को चार जंगली भैंसों के दल को विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सुरक्षित रूप से मुक्त किया गया।
इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्रीमती समिता राजोरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एल. कृष्णमूर्ति ने जंगली भैंसों को बाड़े में निर्मुक्त किया। कार्यक्रम में क्षेत्र संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व श्री रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक (कोर) श्री प्रकाश वर्मा, उप संचालक बफर सुश्री अमिथा के.बी., समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी एवं स्थानीय वन अमला उपस्थित रहा।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसा लगभग 150 वर्ष पूर्व विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा जंगली भैंसा पुनर्स्थापना की विशेष योजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार क्षेत्र में, जहां पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण मिले हैं, असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से जंगली भैंसों को लाकर पुनर्स्थापित किया जा रहा है।
परियोजना के प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को चार जंगली भैंसों को सुपखार स्थित बाड़े में मुख्यमंत्री डा मोहन यादव द्वारा मुक्त किया गया था। द्वितीय चरण में चार और जंगली भैंसों के सफल आगमन के साथ अब तक कुल 8 जंगली भैंसे पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें 2 नर एवं 6 मादा शामिल हैं। वन विभाग ने आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
काजीरंगा टाइगर रिजर्व से कान्हा टाइगर रिजर्व तक लगभग 2220 किलोमीटर की दूरी विशेष वन्यजीव परिवहन वाहनों से सड़क मार्ग द्वारा तय की गई। इस दौरान दो वन्यजीव चिकित्सकों की टीम द्वारा लगातार स्वास्थ्य परीक्षण एवं निगरानी की गई। साथ ही एक सहायक संचालक एवं एक परिक्षेत्र अधिकारी ने पूरे अभियान का नेतृत्व किया। लगभग 72 घंटे की सतत यात्रा के बाद जंगली भैंसों को सुरक्षित रूप से कान्हा पहुंचाया गया।
यह पुनर्स्थापना कार्यक्रम मध्यप्रदेश में जैव विविधता संरक्षण एवं विलुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों के पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


