बालाघाट को आदर्श बांस जिला बनाने की दिशा में पहल
कलेक्टर मृणाल मीना की अध्यक्षता में शनिवार 30 मई को बालाघाट बांस विकास प्राधिकरण के गठन एवं जिले में बांस आधारित रोजगार, उद्यमिता तथा उद्योगों को बढ़ावा देने के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. ए.के. भट्टाचार्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र की महाप्रबंधक प्रीति मर्सकोले, उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय, सहायक उद्यान अधिकारी क्षितिज कराड़े तथा जनजातीय कार्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर मृणाल मीना ने कहा कि जिले में बांस आधारित उद्योगों और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय कारीगरों एवं युवाओं को बांस आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने बताया कि बांस से टोकरी, फर्नीचर, सजावटी एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना एवं पीएमएफएमई योजना के तहत पात्र कारीगरों को प्रशिक्षण और ऋण उपलब्ध कराने में जिला प्रशासन सहयोग करेगा।
बैठक में बालाघाट को आदर्श बांस जिला घोषित किए जाने के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के कुल बांस क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत तथा कुल बांस उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा बालाघाट जिले में है। जिले के आदिवासी एवं विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लिए बांस आजीविका का प्रमुख साधन होने के बावजूद उन्हें इसके व्यापार से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में आदर्श बांस जिला घोषित होने से बांस आधारित विकास योजनाओं को गति मिलेगी और विभिन्न विभागों के प्रयासों में बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. ए.के. भट्टाचार्य ने बांस के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बांस विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली वनस्पतियों में से एक है और इसका लगभग प्रत्येक भाग उपयोगी होता है। बांस का उपयोग फर्नीचर, हस्तशिल्प, ज्वेलरी, कृषि उपकरण, खिलौने, आवास निर्माण, अगरबत्ती निर्माण सहित अनेक उत्पादों में किया जाता है। उन्होंने जिले में उच्च गुणवत्ता वाली बांस प्रजातियों के रोपण पर विशेष बल दिया।
डॉ भट्टाचार्य ने बताया कि बांस विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली एक मात्र वनस्पति है जिसे हम देख सकते है। 27 फरवरी 2002 को भारत में नेशनल बांस मिशन की स्थापना की गई थी। बांस एक मात्र ऐसी वनस्पति है, जिसका 100 प्रतिशत भाग उपयोग होता है। बांस हमें रोटी, कपड़ा और मकान तीनों देता है। बांस कृषि एवं वन दोनों की फसल है। बांस पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार है। बांस का पौधा सबसे अधिक आक्सीजन देता है और 35 प्रतिशत कार्बन को अवशोषित कर लेता है।
दक्षिण वन मंडलाधिकारी नित्यानंदम एल ने जानकारी दी कि वन विभाग द्वारा कृषि वानिकी के तहत किसानों को बांस रोपण के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा बांस के पौधे लगाने पर दो वर्षों में प्रति पौधा 150 रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। बैठक में किसानों द्वारा उत्पादित बांस की सीधी खरीदी, विपणन सुविधाओं के विस्तार और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जिले में उपलब्ध प्रचुर मात्रा में बांस का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन किया जाए और युवाओं तथा कारीगरों को बांस आधारित उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएं।


