सिवनी – छह महीने बाद भी अधूरा पड़ा प्राथमिक शाला भवन, आखिर बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
उगली।
सिवनी जिले की जनपद पंचायत केवलारी अंतर्गत उप तहसील उगली के ग्राम पंचायत खुरसुरा के अंतर्गत आने वाले बरबसपुर में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने गया, लेकिन जिन बच्चों के लिए नया विद्यालय भवन तैयार किया जाना था, वे आज भी अधूरे निर्माण कार्य का इंतजार कर रहे हैं। लगभग छह महीने पहले शुरू हुआ शासकीय प्राथमिक शाला बरबसपुर का नवीन भवन निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि भवन का लेंटर (छत) स्तर का कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूल खुल जाएंगे तो आखिर बच्चों की पढ़ाई किस व्यवस्था के भरोसे संचालित होगी?
आखिर जिस भवन का निर्माण समय पर पूरा होना चाहिए था, वह आज तक अधूरा क्यों है?————-
शिक्षा को विकास की पहली सीढ़ी कहा जाता है, लेकिन बरबसपुर में शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे की यही तस्वीर कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। करोड़ों योजनाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों के बीच गांव के छोटे-छोटे बच्चे अब भी एक पूर्ण विद्यालय भवन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आखिर जिस भवन का निर्माण समय पर पूरा होना चाहिए था, वह आज तक अधूरा क्यों है? इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय भवन निर्माण कार्य लंबे समय से सुस्त गति से चलता रहा और बीच-बीच में पूरी तरह थम भी गया। यदि समय रहते निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी जाती तो नए सत्र से पहले बच्चों को नया भवन मिल सकता था। लेकिन अब स्कूल खुलने की तारीख सामने है,और निर्माण कार्य अब भी अधूरा है।
आखिर बच्चों के सपनों की यह इमारत कब पूरी होगी और इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?———–
यह केवल ईंट, सीमेंट और सरिया का मामला नहीं है, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है। सरकारी स्तर पर शिक्षा सुधार और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि यदि शिक्षा से जुड़े निर्माण कार्य ही समय पर पूरे नहीं हो पाएंगे तो ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण कैसे उपलब्ध कराया जाएगा? बरबसपुर के अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही है। उन्हें डर है कि कहीं एक बार फिर बच्चों को अस्थायी और असुविधाजनक व्यवस्थाओं के बीच पढ़ाई करने के लिए मजबूर न होना पड़े। ग्रामीणों का कहना है, कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। अब निगाहें संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी पर टिकी हैं। 16 जून से स्कूल खुल गये हैं, लेकिन बरबसपुर के बच्चों का नया विद्यालय अब भी अधूरा खड़ा है। ऐसे में यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर बच्चों के सपनों की यह इमारत कब पूरी होगी और इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
इनका कहना है, सरपंच ग्राम पंचायत खुरसुरा
बरसात लगने वाली है, स्कूल भवन का निर्माण मंद गति से चल रहा है, लेंटर भी हो जाता तो बच्चों को बैठालने की समष्या खत्म हो जाती.
शिक्षक – दिनेश सोनेकर…
शाला भवन के निकट एक किराये के भवन में छात्रों को बैठालकर शाला संचालित कर रहें है, निर्माण कार्य सीघ्र हो जाता तो बच्चों को बरसात में परेशानी का सामना नहीं करना पडेगा.


