मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम, 1981 में हुए संशोधन से पहुचेगा सीधे ग्रामीणों को लाभ मध्यप्रदेश विधानसभा में मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम, 1981 में संशोधन पर चर्चा के दौरान कटंगी-खैरलांजी विधायक गौरव सिंह पारधी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा का आभार व्यक्त किया और कहा की राज्य सरकार ग्रामीण परिवारों को उनकी आबादी की जमीन का कानूनी मालिकाना हक दिलाने का काम कर रही है।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम, 1981 में संशोधन किया गया। इस संशोधन के तहत स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी की जमीन की रजिस्ट्री पर लगने वाला सेस (उपकर) पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब गांवों के लाखों परिवार बिना इस अतिरिक्त शुल्क के अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे। इससे उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और अपनी भूमि का कानूनी मालिकाना हक प्राप्त करने का रास्ता भी आसान होगा।
अब आबादी भूमि की रजिस्ट्री पर नहीं लगेगा सेस ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी राहत – गौरव सिंह पारधी
विधायक श्री पारधी ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों में लोगों को उनकी आबादी की जमीन की रजिस्ट्री कराई जा रही है। पहले इस रजिस्ट्री पर सेस (उपकर) देना पड़ता था, लेकिन अब सरकार ने इसे पूरी तरह खत्म कर दिया है। इससे ग्रामीण परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और वे बिना अतिरिक्त बोझ के अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के पास वर्षों से जमीन थी, लेकिन उसके वैध दस्तावेज नहीं थे, उन्हें अब कानूनी स्वामित्व मिलेगा। इससे भविष्य में जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे और ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर पूरा अधिकार मिलेगा। उन्होंने सभी ग्रामीण नागरिकों को इस महत्वपूर्ण फैसले पर बधाई देते हुए कहा कि सरकार गांव के लोगों के जीवन को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।


