जबलपुर। भ्रूण लिंग परीक्षण और पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के उल्लंघन के मामले में जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के तीन सोनोग्राफी सेंटरों के लाइसेंस और पंजीयन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। यह कार्रवाई राजस्व, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
संयुक्त टीम ने 27 और 28 जुलाई को मालवीय चौक स्थित आर.के. एक्स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर तथा अधारताल स्थित सरल डिजिटल एक्स-रे एंड सोनोग्राफी सेंटर का औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान आरोपों के अनुसार यह सामने आया कि आर.के. सेंटर पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को कथित रूप से अवैध लिंग परीक्षण के लिए अधारताल स्थित सरल सोनोग्राफी सेंटर भेजा जाता था।
जांच के दौरान टीम ने दोनों केंद्रों से फॉर्म-एफ, रजिस्टर और अन्य आवश्यक अभिलेख जब्त किए। प्रशासन के अनुसार जांच में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों के गंभीर उल्लंघन के साक्ष्य मिले हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
प्रशासन ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 की धारा-20 के तहत कार्रवाई करते हुए सरल डिजिटल एक्स-रे एंड सोनोग्राफी सेंटर (संचालक: डॉ. सतीश अग्रवाल), महेश सोनोग्राफी सेंटर (संचालक: डॉ. सतीश अग्रवाल) तथा आर.के. एक्स-रे एवं सोनोग्राफी सेंटर (संचालक: डॉ. राजेंद्र कुमार अग्रवाल) के लाइसेंस एवं पंजीयन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं।
प्रशासन ने संबंधित संचालकों को निर्देश दिए हैं कि आदेश के बाद किसी भी प्रकार की सोनोग्राफी अथवा पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत पंजीयन योग्य गतिविधियों का संचालन नहीं किया जाएगा। आदेश का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


