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Jabalpur
September 10, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

छपारा में भी मिलावटी शराब का अंदेशा

गली गली घाट घाट बिक रही सस्ती शराब*
*कहीं जहर तो नहीं बांट रहे अवैध शराब कारोबारी*सी टाइम्स छपारा – सिवनी जिले के छपारा में ऐसा माहौल है कि ऐसा कोई गाँव नहीं जहां 2-4 शराब दुकानें लगाकर बेची जा रही है। छपारा मुख्यालय के आधे से अधिक वार्डों में शराब दुकान के अहाता, सेन्टर खुले हैं जहां घरों से लोगों को शराब उपलब्ध करायी जा रही है। यह पूरा खेल छपारा में शराब माफियाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। छपारा में दो लाइसेंसी दुकानें स्थित हैं। उन दुकानों की बिक्री से अधिक शराब गाँव और मोहल्लों में बिक रही है *गाँव और मोहल्ले में मिल रही दुकान से सस्ती शराब*

मजे की बात तो यह है कि शराब दुकानों में रे टू रेट शराब बेची जा रही है, लेकिन गली मोहल्लों में मिलने वाली शराब आधी कीमत में भी उपलब्ध हो रही है। आखिर कौन कर रहा है गाँव और मोहल्लों में शराब की पैकारी क्या आबकारी विभाग छपारा के इस पूरे खेल से अनजान बैठा है? या फिर आबकारी विभाग व पुलिस विभाग का शराब तस्करों पर संरक्षण बना हुआ है
आखिर कैसे पहुंच रही हैं ठेके से ढाबों तक शराब* छपारा में शराब के अवैध कारोबार का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि अवैध शराब कारोबारी सीधे हाईवे के ढाबों और  गाँव में मोहल्लों में सस्ती व मिलावटी शराब पहुंचा रहे हैं और वहां ठेके से भी कम दाम पर बेची जा रही हैं। शाम 6 बजे बाद  सीधे ढाबों पर अवैध शराब कारोबारीयों द्वारा शराब पहुंचाई जाती हैं। छपारा में उल्टी गंगा बह रही है ठेके से कम दाम में शराब, साथ में चखना और बैठने की व्यवस्था। यानी ढाबा नहीं, पूरा खुला अहाता देखने को मिल सकता है

*ठेके से आ रही है या कहीं और से ?*शराब*


सवाल यह भी है कि गाँव में और छपारा के मोहल्लों पर शराब ठेके से आ रही है या कहीं और
से? यही सबसे बड़ा सवाल है। जो शराब एम आर पी से कम दाम पर आसानी से ब्रांडेड नाम की शराब उपलब्ध कराई जा रही है। कहीं ऐसा तो नहीं, नए युवाओं के साथ वह उनकी जिंदगी के साथ अवैध शराब कारोबारी मिलावटी शराब बेचकर। खिलवाड़ कर रहे हैं।

*ढाबा नहीं, खुला बार*

छपारा-हाईवे मार्ग पर शाम ढलते ही परिवार वाले ढाबों का नजारा बदल जाता है। महफिलें सज जाती हैं। एक-एक ढाबा रात में 1 से 2 पेटी तक खपा देता है।

*युवा बर्बाद, माफिया मालामाल*
फोर व्हीलर से गांव-गांव होम डिलीवरी हो रही है। 14 साल के बच्चे तक नशे की चपेट में हैं। अपराध बढ़ने की बड़ी वजह यही है।

*आबकारी और पुलिस कब जागेगी ?*

बिना एफ एल-2/एफएल 3 लाइसेंस के शराब पिलाना धारा 34 आबकारी एक्ट में अपराध है। फिर भी खुलेआम बिक्री जारी है। आबकारी विभाग और छपारा पुलिस की चुप्पी पर सवाल।

ढाबों पर मिल रही है, वो कहां से आ रही है? क्या ये ठेके के स्टॉक की हेराफेरी है? या दूसरे जिले से लाई गई

बिना ड्यूटी वाली शराब है? या फिर नकली शराब बेचकर युवाओं की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है?

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